गोवर्धन (मथुरा)। मानो एक बार फिर पांच हजार साल पुराने द्वापर युग की लीलाएं सजीव हो उठीं। गिरिराज तलहटी में गिरिराज जी का आकर्षक शृंगार किया गया। गोपियां अपने सिर पर दही, मक्खन की मटकी, पकवानों की टोकरियां लेकर गिरिराज जी को छप्पन भोग लगाने के लिए चली जा रही थीं। भजन-संकीर्तन पर श्रद्धालु नाचते गाते चले जा रहे थे। गोवर्धन पूजा का केंद्र गोवर्धन भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज रहा था।
पांच हजार साल पहले द्वापर में जब भगवान इंद्र ब्रजवासियों से नाराज हो गए तो उन्होंने सात दिन लगातार बरसात की। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए सात दिन तक गिरिराज को अपनी कनिष्क उंगली पर उठा लिया। इंद्र का मान मर्दन हुआ और ब्रजवासियों ने सात दिन, सात रात और चार पहर के हिसाब से अपने कन्हैया को छप्पन भोग लगाए। घर-घर उनके लिए पकवान लाए गए।
शुक्रवार को गोवर्धन में एक बार फिर वही नजारा देखने को मिला। विदेशी महिलाएं गोपिकाओं के रूप में सजीं। श्रद्धालुओं ने परंपरागत ब्रजवासियों की वेषभूषा धारण की। नगर में शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने भाव विभोर होकर पकवानों की टोकरी अपने सिर पर रख ली। नाचते गाते वो गिरिराज प्रभु के लिए भोग लगाने के लिए चल पड़े।
अंतर्राष्ट्रीय गौड़ीय वेदांत समिति गिरधारी गौड़ीय मठ से गोवर्धन पूजा शोभायात्रा निकाली गई। इसमें हरिनाम संकीर्तन के बीच राधाकुंड मार्ग से हरिगोकुल मंदिर से होते हुए राजा वाले मंदिर तलहटी पहुंची। यहां तलहटी में गिरिराज जी का दूध-दही व माखन से अभिषेक किया गया। गिरिराज जी के समक्ष छप्पन भोग लगाये गये। देशी-विदेशी श्रद्धालुओं ने नृत्य किया।
आनंद में सराबोर हुए श्रद्धालु
रूस से आई तुलसी दासी ने बताया कि यहां वे गिरिराज जी की पूजा करने के लिए आई हैं। गुरु माधव दास के निर्देशन में पूजा-अर्चना की है। गिरिराज जी की पूजा का सौभाग्य मिला है। पंजाब जालंधर से आई गीता शर्मा ने बताया कि यहां गिरिराज जी पूजा करने सातवीं बार आई हैं। गिरिराज जी की पूजा करने से उनको परम आनंद की प्राप्ति होती है।