मथुरा। सांसद हेमामालिनी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर सवाल उठाते हुए बीमा कंपनियों को बेनकाब किया है। सांसद ने जो रिपोर्ट पेश की है उसमें कहा है कि किसानों से तो पैसा लिया जा रहा है लेकिन फसल का नुकसान होने पर उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पाता है।
सांसद ने कैग रिपोर्ट के खुलासे को भी शामिल किया है। उन्होंने जांच की भी मांग करते हुए सरकार से पूछा है कि कैग ने जो मैकेनिज्म विकसित करने की सलाह दी थी उस पर सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
फसल बीमा योजना में गड़बड़ी का मुद्दा इस समय प्रदेश भर में गूंज रहा है। कंपनियां फसली बीमा के नाम पर तो काश्तकारों से पैसा ले रही हैं लेकिन जब फसलों को नुकसान होता है तो उसे लाभ नहीं मिल पाता है।
वर्ष 2014-15 में हुई ओलावृष्टि से ही प्रदेश के तीस जिलों में फसलों को नुकसान हुआ था लेकिन बीमा कंपनियों से कोई राहत किसानों को नहीं मिली थी। मंगलवार को मथुरा की सांसद हेमामालिनी ने यह मुद्दा संसद में उठाया।
उन्होंने सिलसिलेवार किसान की पीड़ा को सरकार के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना के तहत बैंक एवं वित्तीय संस्थानों द्वारा किसानों को दिए जाने वाले क्लेम में काफी अनियमितताएं की जाती हैं। स्थिति में सुधार करने तथा फसल बीमा योजना को लक्ष्य के अनुरूप सफल बनाने के लिए एक मैकेनिज्म विकसित करने की सलाह दी गई है।
सरकार बताए कि इस दिशा में अब तक क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने योजना की स्वतंत्र इकाई द्वारा मानीटरिंग न करने के लिए भी सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा है कि इसके लिए क्या नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ मिल सके। उन्होंने सरकार से उत्तर प्रदेश और मथुरा के किसानों को फसल बीमा योजना में मिले लाभ की जानकारी भी मांगी है। जिले में किसानों की संख्या 1.76 लाख है।