ट्रैफिक बैरिकेड्स, पुलिस बूथों पर लगाए जा रहे विज्ञापन बोर्ड व होर्डिंग पर नगर निगम ने आपत्ति जताई है। निगम प्रशासन ने आर्थिक नुकसान का हवाला देते हुए इस संबंध में पुलिस व यातायात पुलिस को पत्र लिखा है। सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम ने बताया कि नगर निगम अधिनियम 1959 के अनुसार शहर में किसी भी प्रकार के वाणिज्यिक विज्ञापन के प्रदर्शन के लिए नगर निगम की अनुमति लेना अनिवार्य है।
शहर के कई प्रमुख चौराहों और मार्गों पर लगे ट्रैफिक बैरिकेड्स और पुलिस बूथों पर निजी कंपनियों और संस्थानों के विज्ञापन प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इनमें से किसी की भी स्वीकृति नगर निगम से नहीं ली गई है। चूंकि इन बैरिकेड्स, पुलिस बूथ पर लगे बोर्ड की संख्या काफी ज्यादा है इसलिए नगर निगम को मिलने वाला विज्ञापन शुल्क प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा पुलिस के जनजागरूकता संदेशों के साथ-साथ व्यावसायिक विज्ञापन से भी होने वाला राजस्व नगर निगम को नहीं आ रहा। ऐसे में निगम ने मांग की है कि पुलिस विज्ञापन का कार्य नगर निगम की पंजीकृत एजेंसियों के माध्यम से कराए।
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने कहा कि शहर में प्रदर्शित होने वाले सभी वाणिज्यिक विज्ञापनों को नियमानुसार नगर निगम की अनुमति के दायरे में लाया जाएगा। स्पष्ट किया कि आगे ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी जिससे सभी प्रकार के विज्ञापनों का राजस्व नगर निगम को प्राप्त हो और शहर में विज्ञापन व्यवस्था भी व्यवस्थित एवं पारदर्शी बन सके।