कितने मरीज, जच्चा-बच्चा की मौत हुई, प्रसव कितने हुए। टीकाकरण की क्या स्थिति है। ऐसी जानकारियां अस्पताल संचालक दबाए हुए हैं। इनकी रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे 231 अस्पतालों को नोटिस दिए हैं। रिपोर्ट नहीं देने पर लाइसेंस निलंबित किए जाएंगे।
अस्पतालों का हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचआईएमएस) में पंजीकरण कराना जरूरी है। इसमें प्रसव की संख्या, प्रसूता-गर्भवती की संख्या, जच्चा-बच्चा और मरीज की मौत, टीकाकरण की स्थिति, संक्रामक रोग (डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू समेत अन्य) के मरीजों, ऑनलाइन बिलिंग समेत कई तरह की जानकारी अपलोड करनी होती है। पोर्टल पर अभी 291 अस्पताल पंजीकृत हैं, जिसमें 231 लंबे समय से रिपोर्ट नहीं दे रहे। इससे डेटा नहीं मिल पा रहा है। इन अस्पतालों पर सख्ती करते हुए नोटिस देते हुए ऑनलाइन विवरण देने के निर्देश दिए हैं।
ये होता है फायदा:
डीपीओ कुलदीप भारद्वाज ने बताया कि ऑनलाइन रिकाॅर्ड से डेटा मेंटेन किया जाता है। इसमें किसी भी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत अधिक होने पर आसानी से जांच की सकती है। आशा के निजी अस्पताल में प्रसव कराने, संक्रामक के नाम पर मरीज से गलत इलाज होने का पता कर सकते हैं। रिकॉर्ड ऑनलाइन होने पर संदिग्ध स्थिति पर अस्पताल चिह्नित किए जा सकते हैं।
196 अस्पतालों को पंजीकरण कराने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग में 487 अस्पताल पंजीकृत हैं, जिनमें से 291 का पोर्टल पर पंजीकरण है, बाकी के 196 अस्पतालों को भी नोटिस देकर एचआईएमएस पर पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। इनको भी नोटिस दिए जा रहे हैं। ऐसा नहीं होने पर इनके भी लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।
रिपोर्ट नहीं देने पर लाइसेंस होगा निलंबित
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पतालों को एचआईएमएस पर रिपोर्ट अपलोड करने के लिए नोटिस दिए हैं। शासन को भी रिपोर्ट भेज रहे हैं। ऐसा नहीं करने पर इन अस्पतालों का लाइसेंस निलंबित किया जाएगा।
तकनीकी दिक्कत आ रही, पंजीकरण को कहा
आईएमए अध्यक्ष डॉ. पंकज नगायच ने बताया कि कई अस्पतालों का ऑनलाइन डेटा तकनीकी कारण से अपलोड नहीं हो पा रहा है। इस संदर्भ में सीएमओ से भी वार्ता हुई है। बचे हुए अस्पतालों के संचालकों को भी पंजीकरण को कहा है।