जलेसर। पहाड़ों पर बर्फ गिरने के साथ ही पक्षी विहार विदेशी परिंदों से गुलजार होने लगा है। अब तक पक्षी विहार में 50 हजार से अधिक विदेशी पक्षी पहुंच चुके हैं। मगर पक्षी विहार को पर्यटकों की कमी खल रही है। ऐसे में रौनक अधूरी है।
जिले का एकमात्र पक्षी विहार प्रात काल: सूरज की किरणों के निकलने के दौरान पक्षियों से कलरव से गूंज उठता है। विशाल झील में प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों का कलरव मन में रोमांच पैदा करता है, तो पक्षियों की उड़ान से मन को शांति मिलती है। अब तक पक्षी विहार में 50 हजार पक्षी पहुंच चुके हैं।
साथ ही अमर उजाला द्वारा चलाए गए अभियान के बाद पक्षी विहार प्रशासन द्वारा पक्षी विहार में दीवारों की पुताई रंगाई के साथ सफाई का कार्य कराया गया है। प्रकृति प्रेमियों का कहना है कि यदि शासन और प्रशासन द्वारा पक्षी विहार का प्रचार प्रसार कराया जाए तो पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होगा। सूत्र बताते हैं कि पक्षी विहार के विकास हेतु डेढ़ करोड़ की प्रस्तावित योजना को भेजे करीब एक माह हो चुका है, लेकिन अभी तक कोई कर्रवाई नहीं हो पाई है।
ये अप्रवासी पक्षी अब तक पहुंचे
पक्षी विहार में ओपेन बिल स्टार्क, व्हाइट ब्लैक स्टार्क, ब्लैकनेक स्टार्क, कारमोरेट, ई-ग्रेट, किंगफिशर, पौंड हीरान, परयिल मोर हेन, गे्रहेरान, काम्बडक ब्लैक आई विश, कोमन मोरहेन, पेंटेड स्टार्क, स्पाट बिलडक, व्हाइट आईविश, परपिल हेरान ने अपना डेरा डाल दिया है।
इन प्रवासी पक्षियों का बसेरा
गैडवाल, पिनटेल, साब्लर, कॉमनटील, कॉटनटील, ग्रेलेक गूज बारहेडेड गूज, स्पून विल, विजिन, रेड केस्टेड पोचार्ड, कामन पौचार्ड गर्गनीटील विस्लिंग टील ब्राहमनी डक, मैलार्ड