वृंदावन। तीन ओर से यमुना से घिरी कान्हा की नगरी वृंदावन में आज भी यमुना में कई नाले गिर रहे हैं। करोड़ों की योजनाएं बनीं, लेकिन यमुना शुद्ध नहीं हो सकी। यमुना आज भी मैली की मैली है। 23 मार्च को मां यमुना का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। लोग मां यमुना का दुग्धाभिषेक और पूजन-अर्चन कर यमुना शुद्धिकरण का संकल्प भी लेंगे।
यमुना नाला, सीवर और दूषित पानी में तब्दील होकर रह गई है। योजनाएं कागजों पर ही सिमटी हैं। यमुना शुद्धिकरण आंदोलन के सहभागी रहे विवेक महाजन ने कहा कि यमुना शुद्धीकरण के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर दो चरणों में लगभग सात सौ करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, इसके बावजूद वृंदावन और गांव के नाले यमुना में लगातार गिर रहे हैं।
यमुना शुद्धिकरण का दूसरा चरण भी यमुना को स्वच्छ नहीं कर सका। उन्होंने कहा कि गत वर्षों से यमुना में सीधे प्रवाहित हो रहे नालों को न बंद किया गया और न ही इन नालों को एसटीपी से जोड़ा गया। संत सेवानंद ब्रह्मचारी कहते हैं कि यमुना छठ पर लोग ईमानदारी के साथ मां यमुना के शुद्धिकरण का संकल्प लें और उस दिशा में आगे बढ़ें तभी परिणाम सार्थक होंगे।
आज भी गिर रहे यमुना में नाले
कालीदह घाट, जुगल घाट, बिहार घाट, भौंराघाट, ज्ञान गुदड़ी घाट, गोविंदघाट, श्मशान घाट, दुर्गापुरम कालोनी, गांव राजपुर का नाला, अक्रूर के नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं।