मैनपुरी। शहर में 18 फरवरी को आरएसएस के जयघोष कार्यक्रम में भारत की एकता और अखंडता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। यह उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो मुस्लिम समाज के लोगों को भारत देश के खिलाफ समझते हैं। जयघोष कार्यक्रम में जिले के 100 मुस्लिम समाज के लोग भाग लेंगे और भारत माता का जयघोष भी करेंगे।
इस बार का आरएसएस का जयघोष कार्यक्रम उन लोगों को संदेश देने वाला होगा जो हिंदू-मुस्लिम के नाम पर देश को बांटने का कार्य कर रहे हैं। वह यह भूल जाते हैं कि भारत में निवास करने वाले लोग पहले भारतीय हैं और बाद में हिंदू-मुस्लिम।
आएसएस के जिला प्रचारक रोहित दीक्षित ने बताया कि संघ ने किसी भी व्यक्ति के साथ कोई भी जबरदस्ती नहीं की है। सभी लोग अपनी स्वेच्छा से जयघोष कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी को पहले की बता दिया गया है। कि संघ अपने तीनों नियमों से कोई भी समझौता नहीं करेगा। पहले नियम के मुताबिक सभी को भारत माता की जय बोलना होगा। दूसरे नियम में भारत को हिंदू राष्ट्र स्वीकार करना होगा।
तीसरे नियम में सभी को गौमाता की सेवा करनी होगी। हिंदू हेल्पलाइन के जिलाअध्यक्ष डॉक्टर सुशीलकांत उपाध्याय ने बताया कि संघ धर्म को नहीं मानता है। जो लोग देश को वरीयता देते हैं। संघ उनका सम्मान करता है। जिले में भारत संकल्प दिवस तिरंगा यात्रा के दौरान भी 400 मुस्लिम समाज के लोगों ने भाग लेकर देशभक्ति को प्रदर्शित किया था।
मैं सबसे पहले देशभक्त हूं, मेरे लिए धर्म बाद में हैं। देश के हित में कार्य करना चाहता हूं। जो भी देशहित में कार्य करेंगा। मैं सदैव उसका साथ दूंगा।
जुबैर हसन अल्वी
देश की सेवा करने में कोई बुराई नहीं हैं। मैं एक सच्चा देश भक्त हूं, इसलिए देश सेवा करना चाहता हूं। इसलिए जयघोष कार्यक्रम में हिस्सा लूंगा।
शाबिर
देशभक्त होना कोई बुराई नहीं है। इसलिए संघ में रहकर देश सेवा करना चाहता हूं। भारत का निवासी होने पर मुझे गर्व है। देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम में भाग लेने में कोई हर्ज नहीं है।
सामीन अली
मैं भारत का निवासी हूं। भारत देश में जमीन को मां का दर्जा दिया गया है और मां की सेवा करने में कोई बुराई नहीं है। देश से जुड़े कार्यक्रम में हर देशवासी को हिस्सा लेना चाहिए।
गुलरेज आलम