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व्यवस्था संभाल रहे होमगार्ड

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traffic police - फोटो : डेमो
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मथुरा। जिले की ट्रैफिक व्यवस्था होमगार्ड और पीआरडी जवानों के हवाले है। मतलब यातायात पुलिस की कमी को चौराहे-तिराहों पर मुस्तैद यह जवान पूरी कर रहे हैं। न कोई ट्रेनिंग और न कोई नियम-कानून की जानकारी। जिले में लगने वाले जाम या फिर वन-वे मार्ग पर ही दौड़ रहे वाहनों से भी इन्हें कोई सरोकार नहीं है। नतीजा यह कि जगह-जगह लगने वाले जाम से हर कोई परेशान हो चुका है।
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शहर हो या देहात, जिधर भी चले जाओ जाम से दो-चार होना पड़ेगा। यातायात पुलिस की कमी को पूरा करने के लिए लगाए गए 30 होमगार्ड और 20 पीआरडी जवान चौराहे-तिराहों पर मुस्तैद तो नजर आते हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली अनाड़ीपन को प्रदर्शित करती है। मतलब ट्रैफिक नियमों की जानकारी का अभाव भी जाम का कारण बनता है। यातायात पुलिस बल के साथ चौराहे और तिराहों पर जमे यह जवान केवल उगाही में ही मशगूल दिखाई देते हैं। चाहे चौराहे पर जाम लगे या फिर सड़क के सहारे खड़े आड़े-तिरछे वाहन इनकी बला से। यह हाल शहर के चौराहे और तिराहों का ही नहीं, बल्कि गोवर्धन, राया, बरसाना, वृंदावन का भी ऐसा ही हाल है। ट्रैफिक के नाम पर हो रही चेकिंग जिले में उगाही का जरिया बनी हुई है। एसपी ट्रैफिक डा. ब्रजेश कुमार सिंह का कहना है कि जल्द ही इस कमी को पूरा कर लिया जाएगा।

महानगर-देहात के प्रमुख स्थलों पर लगता है जाम
ऐसा कोई दिन ही होगा जब महानगर और देहात के प्रमुख स्थान जाम में न फंसते हो। यातायात पुलिस की लापरवाही के चलते लोगों को घंटों जाम में बिताने पड़ते हैं। कई बार तो इस जाम में एंबुलेेंस भी फंस चुकी है। मरीजों के भी जान पर बन आई है। बावजूद इसके आजतक इस जाम से निजात दिलाने में जिला और पुलिस प्रशासन ने कोई पहल नहीं की। महानगर की चरमरा चुकी ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने का कोई कारगर प्लान बने ताकि लोग आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
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