मथुरा। अब अधिकारियों ने भी मान लिया है कि यमुना में नालों का गंदा पानी सीधे गिर रहा है। वृंदावन में तो शोधन क्षमता होने के बाद भी पानी सीधे यमुना में जा रहा है, इसकी वजह नालों का टेप न होना बताया जा रहा है। मथुरा-वृंदावन नगर निगम में एसटीपी होने के बाद भी नालों का पानी सीधे यमुना में समा रहा है। गुुरुवार को प्रमुख सचिव ने निरीक्षण कर स्थिति को जाना।
नगर निगम के सत्यापन में ये बात सामने आई है कि वृंदावन में कुल 19 नाले हैं, इनमें से 14 नाले टेप हैं। लेकिन पांच नालों का गंदा पानी सीधे यमुना में समा रहा है। इनमें सुनरख ड्रेन भी शामिल है। इस प्रकार वृंदावन में उत्सर्जित 12 एमएलडी पानी में से दो एमएलडी पानी सीधे यमुना में समा रहा है।
मथुरा का हाल और बदतर है। यहां 12 बड़े नालों में से चार सीधे यमुना में समा रहे हैं। इनमें शहर के बड़े मसानी, अंबाखार नाला, बंगाली घाट और छावनी नाला शामिल हैं। यहां कुल 56 एमएलडी जल का उत्सर्जन होता है, इसमें से 12 एमएलडी पानी सीधे यमुना में समा रहा है। निगम यमुना में गिर रहे नालों की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज रहा है।
डीएम, नगर निगम और प्रदूषण बोर्ड के सुर अलग-अलग
यमुना में बढ़ते प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट और एनजीटी सख्त है। कोढ़ में खाज ये है कि जिलाधिकारी, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जो हलफनामे दायर किए जा रहे हैं उनमें तथ्य अलग-अलग हैं। इसके चलते सरकार की किरकिरी हो रही है। यही कारण है कि प्रमुख सचिव को खुद मथुरा आकर स्थिति को देखना पड़ रहा है। अब एक रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने के लिए तैयार की जा रही है।