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दरोगा को बचाने को सीओ ने जांच में किया शब्दों का खेल

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यूपी पुलिस - फोटो : फाइल फोटो
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एटा। जमानत पर चल रहे युवक को जेल में बताने वाले सीओ ने अब दागी दरोगा की जांच में कलम की बाजीगरी दिखाई है। हादसे में शामिल ट्रैक्टर बदलने के मामले मे की गई जांच में सीओ ने समान अपराध में एचसीपी के सिर सारा दोष मढ़ते हुए दरोगा का उत्तरदायित्व तक तय नहीं किया। सीओ द्वारा एसएसपी को भेजी जांच रिपोर्ट में अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है।
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जैथरा थाने के तत्कालीन एसओ कैलाश चंद्र दुबे के खिलाफ की गई जांच में पूर्व सीओ के बाद अब वर्तमान सीओ अजय सिंह भदौरिया की जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में है। हादसे में शामिल ट्रैक्टर बदलने के मामले में की गई जांच के निष्कर्ष में सीओ ने एचसीपी चंद्रपाल सिंह को दोषी ठहराया। रिपोर्ट में सीओ ने तत्कालीन एसओ की दोबारा जांच करने पर प्रार्थना पत्र के तथ्यों को सरसरी तौर पर लेना बताकर कलम की बाजीगरी की। हालांकि एचसीपी की जांच रिपोर्ट का एसओ ने दोबारा जांच में समर्थन किया है। दरोगा ने दोबारा जांच में ट्रैक्टर बदलने के फर्जी प्रार्थना पत्र की तस्दीक नहीं की और न ही हादसे में शामिल ट्रैक्टर पता लगाया। हालांकि ट्रैक्टर बदलने का मामला पूर्व सीओ की जांच में उजागर हो चुका था। पुलिस रेगुलेशन के अनु सार जीडी में लिखे हर शब्द की जिम्मेदारी एसओ की होती है। घटना में शामिल ट्रैक्टर जीडी में दाखिल होने के बाद बदला गया। ऐसे में एसओ की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन सीओ ने जांच में दरोगा की भूमिका को लेकर कोई स्पष्ट मत नहीं दिया। सरसरी शब्द का इस्तेमाल कर दरोगा को बचाने की कोशिश गई है।
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यह था मामला
दिनेश कुमार की 11 वर्षीय बेटी प्रियंका की 19 फरवरी 2016 को ट्रैक्टर से कुचल कर मौत हो गई थी। मामले की रिपोर्ट नगला कंचन निवासी शीलेंद्र के खिलाफ दर्ज की गई थी। पुलिस ने मौके से ट्रैक्टर कब्जे में लेकर जीडी में दाखिल कर दिया। 40 दिन बाद एसओ ने वादी से मिलीभगत कर फर्जी प्रार्थना पत्र से हादसे में शामिल ट्रैैक्टर बदल दिया। शिकायत पर तत्कालीन एसएसपी ने जांच के आदेश दिए थे ।
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