आगरा। जिले में 212 लोकेशन ऐसे हैं, जहां लोगों की जान जा रही है। कभी तेज गति तो कभी गलत दिशा में वाहन दाैड़ाने से हादसे हो रहे हैं। साल में दो या उससे अधिक हादसे वाले स्थानों को क्रिटिकल क्रैश लोकेशन के रूप में चिह्नित किया गया है।
इन लोकेशन पर रोड इंजीनियरिंग की खामियों को दूर किया जाएगा। हादसों को रोकने के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे। यह जानकारी सोमवार को डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार ने पुलिस लाइन में आयोजित बैठक में दी। उन्होंने बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट की ओर से देशभर में हादसों के संबंध में सर्वे कराया गया था।
इसमें सामने आया कि 100 जिले ऐसे हैं, जहां पर सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के 20 जिले शामिल हैं। इनमें आगरा भी एक है। इसमें 2 या अधिक हादसे वाले स्थानों को क्रिटिकल क्रैश लोकेशन के रूप में चिह्नित किया गया है। इन लोकेशन में सुधारात्मक उपाय कराने के लिए क्रिटिकल काॅरिडोर टीम बनाई गई है।
दरोगा और सिपाही करेंगे जांच
डीसीपी ने बताया कि उन पांच क्षेत्रों को क्रिटिकल कॉरिडोर के रूप में चिह्नित किया गया है, जहां सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं। जो अतिसंवेदनशील हैं। इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करके पुलिस प्रशासन का लक्ष्य हादसों में होने वाली मौतों को खत्म करना है।
संबंधित थानों में 17 विशेष क्रिटिकल कॉरिडोर (सीसी) टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों में योग्य पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया है। सीसी टीम में एक दारोगा और चार हेड कांस्टेबल हैं। इन टीमों को विशेष रूप से सड़क दुर्घटनाओं के मामलों की जांच करने और मृत्यु को रोकने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कर्मचारी विभिन्न विभागों से भी समन्वय करेंगे। हादसों को रोकने के लिए रोड इंजीनियरिंग से लेकर अन्य बदलाव कराएंगे।
यह रास्ते हैं जानलेवा
रामबाग से एत्मादपुर के एनएच- 19 पर 66, फाउंड्री नगर से खंदौली एनएच- 509 पर 33, सैंया से ककुआ और रायभा से रैपुरा जाट एनएच 44 पर 91, बरहन के जमाल नगर भैंस से रामबाग व फतेहपुर सीकरी एनएच 21 पर 100 और बसई चौकी से बाह के कचौरा घाट तक एसएच 62 पर 90 लोगों की जान जा चुकी है।
यह रहेगी जिम्मेदारी
- दुर्घटना के कारणों (जैसे खराब इंजीनियरिंग, ब्लैक स्पॉट, या यातायात नियमों का उल्लंघन) की पहचान करना।
- स्थानीय लोगों और इंजीनियरिंग विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सुधारात्मक कदम उठाना।
- सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
- टीमें हादसों की प्राथमिकी दर्ज होने के बाद विवेचना भी करेंगी।