आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि (भड़ली नवमी) 18 जुलाई को है। जिसे अबूझ मुहूर्त मानकर इस तिथि में शादियां की जाती हैं। इसके बाद अगला अबूझ मुहूर्त देवउठनी एकादशी को होगा, जोकि 14 नवंबर को है। चार महीने बाद इसी दिन से शादियों की शुरुआत हो जाएगी। मथुरा में कोरोना थमने के बाद पहली बार इस तरह से आयोजन हो रहे हैं। भड़ली नवमी पर करीब 100 करोड़ के कारोबार की उम्मीद है।
ज्योतिषाचार्य आचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाएगा, जो कि 14 नवंबर तक रहेगा। तकरीबन इन 4 महीनों के दौरान शुभ कार्यो के लिए मुहूर्त नहीं रहेंगे। इसके बाद 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच में सूर्य धनु राशि में आ जाएगा। जिसे धनुर्मास कहते हैं। इस एक महीने के दौरान भी शुभ काम नहीं किए जाते हैं।
होटल व्यवसायी अमित जैन ने बताया कि कोरोना काल में सब कुछ बंद था, अब शादी विवाह होने से होटल इंडस्ट्री की माली हालत सुधरेगी। मैरिज होम संचालक प्रमोद गर्ग कसेरे ने बताया कि घोड़े वाले, बैंड वाले समेत अन्य को सभी को काम मिलेगा। सराफा कारोबारी अजयकांत गर्ग का कहना है कि विगत कई महीनों से कोरोना के चलते शादियों में होने वाले अनाप-शनाप भीड़ एवं खर्चों पर रोक लगी है।