कासगंज। लोकतंत्र के कई पर्वों के साक्षी बने बेसहारा वृद्ध अब लाचारी की बेड़ियों में बंधे नजर आ रहे हैं। एक तो उन्हें अपनों से पराए होने और दूसरे अपने अधिकार खोने का भी दर्द है। वह मताधिकार का हक तो रखते हैं, लेकिन वह मत देने में लाचार हैं। किसी को बीमारी की बेड़ियों ने जकड़ा है, तो किसी के कदम बूथ तक पहुंचने में लड़ख़ड़ा रहे हैं। अमर उजाला ने जब वृद्धाश्रम पहुंच वृद्धों के मन की बात जानी तो उनके दिल का दर्द छलक उठा। उनका कहना था कि मतदान के दिन चाहें एक दिन गरीब और वृद्धों को दान मत करो, लेकिन मतदान जरूर करो।
गांव किशोरपुर के 65 वर्षीय वृद्ध मुन्ना लाल, विक्रमपुर के सौदान सिंह, अहरौली के पन्ना लाल अपने साथियों के साथ वृद्धाश्रम में चुनावी चर्चा में मशगूल थे। इस बीच वह अपनों द्वारा दिए दर्द को भूले गए। वृद्ध मुन्ना लाल साथियों को बता रहे थे कि उन्होंने कासगंज के सहावर में 1980 में इंद्रा गांधी की सभा का आयोजन कराने का मौका मिला। तब वह एक सक्रिय कार्यकर्ता थे। लेकिन अब परिजनों ने पराया कर दिया, वो तो मतदान के लिए बुलाने नहीं आएंगे। जेब में रुपये नहीं कि वे किराया खर्च कर मतदान करने जा सकें। कोई नेता वोट डलवाने तो दूर वृद्धाश्रम में वोट मांगने भी नहीं आता। प्रशासन बूथों तक भेजने की कोई व्यवस्था नहीं करता। वृद्ध महिला मतदाता वीरवती सहित अन्य कई का भी यही दर्द था।
आश्रम में हैं 67 मतदाता
वृद्धाश्रम में 67 वृद्ध पंजीकृत हैं। हालांकि अब भी वृद्ध जोश भर रहे हैं कि यदि किसी ने उन्हें बूथ तक ले जाने का प्रयास किया तो वह अभी भी अहम निर्णायक की भूमिका निभाएंगे।
- मतदाताओं को बूथों तक भेजने के लिए कोई भी दिशा निर्देश शासन की ओर से नहीं मिले हैं। कुछ मतदाताओं ने मतदान की इच्छा जताई है। निजी खर्चे पर उन्हें बूथ तक भेजने का प्रयास कर रहे हैं।
- नीरज निगम, अधीक्षिका, वृद्धाश्रम।
- जनपद के वृद्ध मतदाता जो वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। यदि उनका वोट है तो उनका वोट डलवाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। इस संबंध में वृद्ध आश्रम से जानकारी भी मांगी जाएगी।
-चंद्र प्रकाश सिंह, डीएम।