मैनपुरी। महिला और बच्चों को बेहतर उपचार दिलाने के लिए 16.10 करोड़ की लागत से बनाया गया 100 शैय्या मातृ एवं शिशु अस्पताल जिले के लोगों का मुंह चिढ़ा रहा है। महिलाओं के लिए बने अस्पताल में महिलाओं को ही उपचार नहीं मिल पा रहा है। लोकार्पण के तीन साल बाद भी अस्पताल में डॉक्टरों के साथ ही फर्नीचर आदि की व्यवस्था नहीं हो सकी। इसके चलते जिले की महिलाओं का उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। देखरेख के अभाव में यहां लगाए गए कई उपकरणों की चोरी भी हो चुकी है। वार्डों में लगीं खिड़कियों को तोड़ दिया गया है। वहीं, ऑक्सीजन तथा पानी की पाइप लाइन आदि को भी चोर उड़ा चुके हैं।
जिले के लोगों ने महिलाओं तथा बच्चों के उचित उपचार तथा सीजेरियन प्रसव को देखते हुए महिला विंग की मांग की थी। इसे देखते हुए अखिलेश सरकार ने मातृ एवं शिशु अस्पताल के लिए 16.10 करोड़ रुपये वर्ष 2016 में जारी किए थे। इसके बाद भवन का निर्माण कराया गया। अस्पताल के लोकार्पण के बाद यहां तीन डॉक्टरों और छह फार्मासिस्टों की तैनाती कर दी गई थी। अब भाजपा सरकार में अभी तक अस्पताल के लिए फर्नीचर और अन्य सामान की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
महिला अस्पताल की दवा से चल रहा है काम
मैनपुरी। 100 शैय्या अस्पताल में बच़्चों की ओपीडी का संचालन शुरू कर दिया गया है। लेकिन यहां दवाइयां तक मौजूद नहीं हैं। इससे यहां आने वाले बच्चों को महिला अस्पताल से दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
महिला अस्पताल में प्रतिदिन पहुंचते हैं 400 से 500 मरीज
मैनपुरी। जिला महिला अस्पताल में मरीजों की अधिकता को देखते हुए 100 शैय्या मातृ एवं शिशु अस्पताल का निर्माण पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधायक सदर राजकुमार यादव की मांग पर किया था। लेकिन सरकार की वह मंशा पूरी नहीं हो सकी। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 400 से 500 महिला मरीज पहुंचते हैं। जिन्हें उचित उपचार देना संभव नहीं दिख रहा है। इसके अतिरिक्त यहां मात्र 30 मरीजों को भर्ती किए जाने की ही व्यवस्था है।
सीजेरियन प्रसव की नहीं है व्यवस्था
मैनपुरी। जिले में सीजेरियन प्रसव की व्यवस्था नहीं है। महिला अस्पताल में आठ पदों के सापेक्ष मात्र सीएमएस सहित मात्र तीन डॉक्टरों की तैनाती है। निश्चेतक (बेहोशी का डॉक्टर) तैनात न होने के कारण यहां सीजेरियन प्रसव नहीं हो पा रहे हैं। जिसके चलते प्रसव के दौरान आने वाली महिलाओं को जरा भी परेशानी होने पर रेफर कर दिया जाता है। जिला महिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड के अनुसार प्रतिदिन 10 से 15 प्रसव पीड़िताओं को सैफई के लिए रेफर करना पड़ता है। जबकि लोगों को पहले से ही जानकारी होने के कारण प्रतिदिन 30 से 40 महिलाओं को निजी डॉक्टरों के यहां प्रसव कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
100 शैय्या अस्पताल एक नजर में
निर्माण वर्ष- 2016
लागत- 16.10 करोड़
क्षमता-100 शैय्या
डॉक्टरों के सृजित पद- 18
कार्यरत- 03