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‘कासगंजी अमरूद की मिठास के नेपाली भी दीवाने’

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‘कासगंजी अमरूद की मिठास के नेपाली भी दीवाने’ - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज/भरगैन। सदी के मौसम में अमरूद नहीं खाया तो क्या खाया। यह फल सेहत के लिए तो लाभदायक माना ही जाता है। साथ ही इसकी बागवानी करने वाले किसानों के लिए भी यह फल आय का एक अच्छा जरिया है, लेकिन इसकी फसल को लेकर शासन स्तर से गंभीरता नहीं दिखाई जाती। कासगंज में भी अमरूद की अच्छा उत्पादन होता है। बड़ी बात यह कि कासगंज के अमरूद की भारत के बड़े शहरों के अलावा नेपाल में अधिक मांग होती है। यहां से प्रति वर्ष सैकड़ों क्विंटल अमरूद नेपाल भेजा जाता है।
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जनपद में बड़े पैमाने पर अमरूद की फसल होती है। क्षेत्र के कासगंज, अमापुर, पटियाली, भरगैन, सोरों, सहावर एवं अमापुर के ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़े पैमाने पर इसकी बागवानी होती है। सैकड़ों की संख्या में किसान इस फसल से जुड़े हुए हैं। लगभग 20 हजार हेक्टेयर में इसके बाग फैले हुए हैं। वैसे तो अमरूद की कई प्रजातियां हैं, लेकिन जनपद में सबसे अधिक इलाहाबादी सफेदा फसल की पैदावार होती है। इसके अलावा बीएनआर, थाई, चित्तीदार प्रजाति भी यहां होती है। इन सभी प्रजातियों की अपनी अपनी विशेषताएं हैं। फसल के सीजन में यहां से बड़ी मात्रा में अमरूद नेपाल को भी भेजा जाता है। जबकि देश में प्रदेश के अलावा राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली में भी बड़े पैमाने पर इस फसल का लदान किया जाता है।
अमरूद खाने से क्या हैं फायदे
कासगंज। अमरूद में कई प्रकार के विटामिन व पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके सेवन करने से शरीर की कोशिकाओं में सुधार आने, कब्ज, मुंह के छाले, कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित करने, थायराइड आदि में लाभदायक हैं।
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इन क्षेत्रों में होती सबसे अधिक बागवानी
कासगंज। अमरूद की फसल की बागवानी कासगंज में ढोलना, घिनोना, मुबारिकपुर, मनौटा, तिलसई खुर्द, अमापुर में पीरी, खुशकरी, नीमरी, दिहारी, नगला समस, सोरों में प्रहलादपुर, बहादुर नगर, मल्लाहनगर, पटियाली में भरगैन, मझोला, नगला ल्यवरईया, तेलियान, नगला कटि, बुधूपुरा, गिदलालपुर, नई मुसियार, लुहारी, लाल बादरा, मोहकमपुर, ककराला, गढ़िया, सहावर में गनेशपुर, फरोली, खितोली क्षेत्रों में अच्छे बाग हैं।
उद्यान व्रिभाग नहीं देता बागवानी को प्रोत्साहन
कासगंज। उद्यान विभाग की ओर से अमरूद की फसल के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की जाती। पहले विभाग के माध्यम से इलाहाबादी सफेदा की पौध उपलब्ध कराई जाती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था भी बंद कर दी। बाग लगाने के लिए किसान को स्वयं ही पौध की व्यवस्था करनी होती है।
अमरूद की फसल बडे पैमाने पर पैदा होती है। नेपाल तक फसल को भेजा जाता है। जबकि देश के भी कई राज्यों में फसल भेजी जाती है। - रिहान खां निवासी भरगैन
बाजार में रिटेल में अमरूद 30 रुपये किलो तक बिक रहा है, लेकिन किसान को काफी कम कीमत मिल पाती है। अढ़तिया उनकी फसल की कीमत निर्धारित करते हैं।
- राम बहादुर किसान
अमरुद उत्पादकों के लिए रोग निदान तक की सलाह उद्यान विभाग की ओर से नहीं दी जाती, जिससे किसानों को काफी समस्या रहती है। जानकारी के अभाव में फसल में कीड़े लग जाने पर उत्पादन प्रभावित हो जाता है। - राम भरोसे, अमरूद उत्पादक
अमरूद की फसल के लिए शासन स्तर से कोई योजना संचालित नहीं की जा रही। पहले विभाग पौध उपलब्ध कराता था, अब वह भी नहीं कराया जाता है। - विपिन कुमार सहायक उद्यान निरीक्षक
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