मैनपुरी। जिले की अधिकतर बैैंकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। बैंकों में तैनात सुरक्षा गार्ड लापरवाह नजर आते हैं। सुरक्षा से ज्यादा इनकी जिम्मेदारी पत्रावलियों को इधर से उधर लाने और ले जाने की है।
सुरक्षा के नाम पर बैंक अफसर सिर्फ सीसीटीवी कैमरों की दुहाई देते हैं। नोएडा में हुई वारदात ने बैंकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले में भी बैंक सुरक्षा के सभी मानक पूरे नहीं करती हैं।
बैंकों में सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, लेकिन वह सुरक्षा करने की जगह बैंक से जुड़े अन्य कार्य करते हैं। कई बैंकों में सुरक्षा गार्ड से कैश काउंटर से मैनेजर के पास चेक पास कराने के लिए जाने और ले जाने की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके साथ ही कई अन्य पत्रावलियों को भी लाने और ले जाने का काम इनसे लिया जा रहा है। कभी-कभी तक कर्मचारी इनसे चाय तक मंगा लेते हैं। सवाल उठता है कि सुरक्षा गार्ड जब बेगार में लगे रहेंगे तो बैंक की सुरक्षा कौन करेगा।
देहात क्षेत्र के अधिकांश बैंकों में सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हुए हैं। हालांकि शहरी क्षेत्रों के बैंकों में सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे हैं। जनपद में भी कई ऐसी घटनाएं हुईं हैं जो बैंकों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं।
करीब डेढ़ वर्ष पूर्व दिनदहाड़े बदमाशों ने कचहरी रोड स्थित कैनरा बैंक में लोगों को बंधक बनाकर 20 लाख की डकैती की थी। इस घटना के बाद सुरक्षा को लेकर तमाम दावे किए, लेकिन कुछ महीने बाद उक्त बैंक में ही चोरी की वारदात हो गई थी।
इसके अलावा मंडी परिसर स्थित बैंक ऑफ इंडिया में भी जंगला काटकर प्रवेश किए चोर स्ट्रांग रूम तक पहंच गए थे। हालांकि लॉकर तोडने में नाकाम रहे थे।
18 सितंबर की रात चोरों ने भोगांव स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा के ताले तोड़ दिए थे। हालांकि चोरी की कोशिश में वह सफल नहीं हुए।
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बैंकों के शाखा प्रबंधकों के साथ बैठक की जा चुकी है। उनसे सुरक्षा के लिए सीसीटीवी ठीक रखने के लिए कहा गया है। पुलिसकर्मी भी बैंकों के आसपास विशेष रूप से गश्त करते हैं।
अजय शंकर राय, एसपी
सभी शाखा प्रबंधक सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें। बैंक शाखाओं में रखे सीसीटीवी कैमरे और सायरन ठीक करें। जिससे किसी भी वारदात को रोका जा सके।
नेकराम सिंह, एलडीएम