फिरोजाबाद। जिला प्रशासन पंजीकृत अस्पताल, होटल, मैरिज होम, रेस्टोरेंट, ढाबों का सर्वे कराएगा कि इकाइयों द्वारा किस तरह का प्रदूषण फैलाया जा रहा है। इनसे होने वाले प्रदूषण को किस तरह रोका जा सकता है। इसके लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।
ताजमहल के अलावा रखरखाव में लापरवाही बरतने का मामला मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को रोकने के लिए विजन डाक्यूमेंट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। 28 अगस्त को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिए हैं कि सभी कैटेगिरी के उद्योग, अस्पताल, होटल, मैरिज होम, रेस्टोरेंट, ढाबों की सूची स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्कीटेक्चर को उपलब्ध करा दी जाए।
सूची में यह भी स्पष्ट करें कि यह उद्योग रेड, औरेंज, ग्रीन या व्हाइट किस कैटेगिरी में आते हैं, कब से पंजीकृत हैं। ये उद्योग किस तरह प्रदूषण फैला रहे हैं अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के क्या इंतजाम किए हैं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्कीटेक्चर द्वारा विजन डाक्यूमेंट में सुझाव शामिल किए जाएं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिले में पंजीकृत इकाइयों अस्पताल, होटल, मैरिज होम, रेस्टोरेंट और ढाबों का सर्वे कराने के लिए जिला प्रशासन की टीम का गठन किया जाएगा। इस टीम में उद्योग विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, श्रम विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अपर आयुक्त उद्योग अंजू रानी ने विभागीय अफसरों की बैठक बुला इकाइयों का ब्योरा जुटाने पर मंथन किया। अपर आयुक्त उद्योग अंजू रानी ने पीएमईजीपी, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, मुद्रा लोन, ओडीओपी सहित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। अपर आयुक्त उद्योग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने टीटीजेड में पंजीकृत हर कैटेगिरी की सूची मांगी है। अधिकांश इकाइयों के लिए आवेदन ऑनलाइन किए जा रहे हैं।
सहायक आयुक्त अमरेश पांडे ने बताया कि फिरोजाबाद में 433 पुरानी इकाइयां पंजीकृत हैं। उनका पूरा ब्योरा टीटीजेड अथॉरिटी, पर्यावरण मंत्रालय को भेजा चुका है। ऑनलाइन कितने आवेदन हो रहे हैं, इसका आंकलन करना संभव नहीं है। इन इकाइयों की सूचना ऑनलाइन वेबसाइट पर ही देखी जा सकती है।