जिला अस्पताल का हाल बेहाल हो चुका है। मरीजों को न तो चिकित्सा सुविधा मिल रही है और न ही उनको खाना नसीब हो रहा है। आलम यह है कि ओपीडी से डाक्टर नदारद हैं, तो खाने में गुणवत्ता की कमी है। सोमवार को अमर उजाला टीम ने जिला अस्पताल में ओपीडी का रियलटी चेक किया। इस दौरान 8:30 बजे तक डाक्टर ही नहीं पहुंचे। वहीं मरीज बेहाल होकर डाक्टरों का इंतजार करते नजर आए।
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फिजीशियन कक्ष में लगी कतार
बदलते मौसम में लोगों को बीमारियों का खतरा सता रहा है। सोमवार सुबह 8:23 बजे ओपीडी कक्ष के बाहर मरीजों की कतार लगी थी, मगर डॉक्टर नदारद थे। काफी देर तक डाक्टर नहीं आए, तो मरीज वहीं बैठकर इंतजार करने लगे।
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सर्जिकल में ताला, बाल रोग में सन्नाटा
इसके साथ ही अस्पताल के सर्जिकल विभाग में ताला लटका हुआ था। वहीं बाल रोग विभाग में कुर्सियां खाली पड़ी थीं। इसके सामने पड़ी कुर्सियों पर लोग अपने बच्चों को लेकर डाक्टर का इंतजार करते नजर आए।
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9 बजे तक नहीं खुला नेत्र विभाग का दरवाजा
जिला अस्पताल में नेत्र विभाग का ताला नौ बजे तक नहीं खुला। मरीज परेशान होकर इधर-उधर भटकते नजर आए। अस्थि रोग विशेषज्ञ भी नदारद रहे। इस दौरान मरीजों ने डाक्टरों के समय से नहीं आने पर आक्रोश जताया।
खाने का हाल भी बदहाल
जिला अस्पताल में मरीजों को मिलने वाले खाने का हाल भी बेहाल है। जनरल वार्ड में भर्ती जिरसमी के पप्पू ने बताया कि खाने के लिए पांच सूखी रोटी मिलती हैं और पतली दाल मिलती है। इसमें पूरा खाना नहीं हो पाता। गिरौरा के गेंदालाल ने बताया कि कभी-कभी दूध मिल जाता है। मगर रोटियां दांतों इतनी कड़क होती हैं कि चबाई नहीं जातीं। कुंवरपुर के युवराज ने बताया कि खाना तो मिलता है, लेकिन देखकर खाने का मन नहीं करता। सत्तारपुर के शीलेंद्र का भी कुछ यही कहना था कि खाने का हाल सुधरना चाहिए। मरीजों को पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए।