गर्मी में तरबूज जमकर खाए जाते हैं, लेकिन एटा जिले के गांव मानिकपुर में तरबूज खाने से गांव के करीब 200 लोग बीमार पड़ गए। हर घर में चारपाई बिछी, तो स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में डेरा डाल दिया।
एटा के ब्लॉक सकीट क्षेत्र के गांव मानिकपुर में तीन दिन पहले सड़े तरबूज खाने से लोग डायरिया की चपेट में आ गए थे। रविवार को गांव में स्वास्थ्य टीम पहुंची और घर-घर जाकर दवाएं बांटी गईं। 200 से अधिक लोग डायरिया की चपेट में आ चुके हैं, अब हालात सामान्य हैं।
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गांव में 27 मई की दोपहर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर कुछ लोग तरबूज बेच गए थे। सस्ती दर पर लोगों ने इन्हें खरीद लिया। काटने पर वे अंदर से सड़े निकले, हालांकि लोगों ने इन्हें खा लिया और एक के बाद एक डायरिया की चपेट में आते गए। स्वास्थ्य विभाग को जानकारी मिली तो टीमों को भेजकर उपचार शुरू कराया गया। रविवार को पीएचसी सकीट से स्वास्थ्य टीम पहुंची और 100 लोगों की ओपीडी की गई।
इनमें से 15 लोग डायरिया, 25 बुखार व 60 अन्य मरीज मिले। इनके अलावा गांव में रह रहे करीब 400 लोगों को घर-घर दवाएं वितरित की गईं। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. गौरव यादव ने बताया कि गांव में स्थिति सामान्य है। रविवार को टीम भेजकर मरीजों को उपचार दिलाया गया। 15 लोग डायरिया के मिले हैं, पूरे गांव में दवाएं वितरित कराई गई हैं।
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सीएमओ डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मानिकपुर गांव में सड़े तरबूज खाने से लोग बीमार हुए थे। अब तक 222 लोगों को डायरिया हो चुका है। दवाएं देने के बाद लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिल गया है और स्थिति सामान्य है। लोगों को सड़े-गले फलों से परहेज करने की सलाह दी गई है।