मथुरा। स्थानांतरण प्रक्रिया में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। कलक्ट्रेट के 20 बाबू और 30 लेखपालों के ट्रांसफर कर दिए गए हैं। अरसे से यह सभी बाबू एक ही पटल पर जमे थे। स्थानांतरण की इस प्रक्रिया से कर्मचारियों में खलबली मची हुई है।
राज्य सरकार ने स्थानांतरण नीति लागू कर दी है। इसका अनुपालन प्रत्येक विभाग स्तर पर किया जाना है। जनपद में इसके तहत कलक्ट्रेट के 20 बाबुओं के पटल बदल दिए गए हैं। कलक्ट्रेट में 2011 के बाद बाबुओं के स्थानांतरण किए गए हैं। हालांकि इसमें कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष का रुतबा इस बार भी बरकरार रहा है। इसके अलावा 30 लेखपालों के भी ट्रांसफर किए गए हैं। इन सभी लेखपालों की तहसील बदली गई हैं। इसमें महावन तहसील से 12, छाता तहसील से 8, मांट तहसील से 6 और सदर तहसील से 4 लेखपाल शामिल रहे हैं। नवसृजित गोवर्धन तहसील में किसी लेखपाल का ट्रांसफर नहीं किया गया है। यह सभी लेखपाल 10-10 साल से संबंधित तहसीलों में जमे थे। ट्रांसफर की इस प्रक्रिया ने कर्मचारियों में खलबली मचा दी है। संभावना जताई जा रही है कि अब अमीनों के भी ट्रांसफर हो सकते हैं। बड़ी संख्या में अमीन एक ही क्षेत्र में लंबे समय से जमे हैं।
पीडब्ल्यूडी में 10 साल से जमे हैं बाबू
मथुरा। पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय और निर्माण खंड में बाबू 10-10 वर्ष से जमे हैं। शासन के आदेश के बाद भी यहां अब तक स्थानांतरण प्रक्रिया पर अमल नहीं किया जा रहा है। गौरतलब रहे कि प्रांतीय खंड के एक्सईएन एसके वर्मा तो खुद ट्रांसफर होने के बावजूद 6 माह से सीट पर जमे हैं। लोकसभा चुनावों के दौरान भारत निर्वाचन आयोग का आदेश भी उन्होंने अप्रभावी करा दिया था।