आगरा में स्मार्ट सिटी योजना की आड़ में मनमाने ढंग से बजट को ठिकाने लगाने की तैयारी की जा रही है। पूर्वी गेट की तरफ से ताजमहल में प्रवेश करने वाले पर्यटकों को नाले की दुर्गंध से बचाने के बहाने 23 करोड़ की लागत से ‘ताज पूर्वी ड्रेन’ के नाम पर इसके चार किमी दायरे के नालों को ढंकने की योजना तैयार की है। जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने 1.33 करोड़ की लागत से पूर्वी गेट की तरफ दुर्गंध रोकने का सुझाव दिया है। इसकी कार्ययोजना भी जिलाधिकारी को भेजी है।
जनहित एवं पर्यटन हित को देखते हुए ताजमहल पूर्वी गेट की तरफ नाले की दुर्गंध को रोकने पर कवायद हुई थी। इसके लिए पिछले दिनों जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार, सुप्रीम कोर्ट अनुश्रवण समिति के सदस्य रमन, वन विभाग, नगर निगम और राजस्व विभाग सहित कई विभागों के अधिकारियों ने एएमयू के एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग के डा. नदीम खलील की मौजूदगी में संयुक्त रूप से ताज पूर्वी गेट नाले का निरीक्षण किया था। इस दौरान गंदे पानी के निस्तारण के लिए मानकों के अनुसार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने पर विचार विमर्श हुआ था।
ताजमहल के 500 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में गंदे नाले के पानी एवं उक्त के साथ आ रहे कूड़े-कचरे के निस्तारण के लिए पर्याप्त ‘इन-सीटू’ ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कराया जाना प्रस्तावित किया गया। डा. खलील ने निरीक्षण और सर्वे करने के बाद हाल ही में ‘इन-सीटू’ ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर अपना सुझाव कार्ययोजना के साथ डीएम को भेजा दिया है। इसकी लागत सिर्फ 1.33 करोड़ रुपये प्रस्तावित है।
इधर, इसी दुर्गंध को रोकने की आड़ में स्मार्ट सिटी योजना के तहत 23 करोड़ रुपये की योजना तैयार कर दी गई। इसमें सिर्फ ताजमहल के पूर्वी गेट ही नहीं, बल्कि इस लागत से इसके दायरे के चार किमी नालों को ढंकने की योजना बनाई गई। मगर, इससे दुर्गंध कम नहीं हो पाती।
क्या है ‘इन-सीटू’ ट्रीटमेंट प्लांट
एएमयू के प्रोफेसर द्वारा तैयार की गई ‘इन-सीटू’ ट्रीटमेंट प्लांट योजना के तहत ताज पूर्वी गेट नाले को प्राकृतिक तरीके से साफ करने का सुझाव दिया है। ‘इन-सीटू’ योजना में नाले में पत्थर और बैक्टीरिया डाले जाते हैं। इससे नाले का पानी पत्थरों के बीच से छनकर गुजरता है। बैक्टीरिया गंदगी को खत्म कर केमिकल ऑक्सीजन डिमांड को नियंत्रित करते हैं। इससे दुर्गंध पर रोक लगती है।
खुले नाले बने हादसे का सबब
28 मार्च को इंडस्ट्रियल क्षेत्र, शास्त्रीपुरम के खुले नाले में एक कार समा गई थी। इसमें दो युवक और युवतियों की मौत हो गई थी। अगले ही दिन एक बाइक सवार इसी नाले में समा गया था। इसके अलावा शहर में अन्य ऐसे तमाम बड़े खुले नाले हैं, जिनमें आए दिन कोई न कोई हादसा होता रहता है। ऐसे में खतरनाक नालों को ढंकने की बजाय ताज के पास सुरक्षित नालों को ढंकने की कवायद पर कुछ लोगों ने सवाल खड़े किए हैं।
नहीं हुआ टेंडर
स्मार्ट सिटी योजना के इस कार्य के लिए पिछले दिनों टेंडर आमंत्रित किए गए थे। मगर, इस कार्य को करने के लिए किसी भी कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई। एक भी टेंडर नहीं आया था। इसके चलते टेंडर प्रक्रिया अभी तक लटकी हुई है।
स्मार्ट सिटी योजना प्रभारी के आरके सिंह ने बताया कि 23 करोड़ में सिर्फ ताजमहल पूर्वी गेट की तरफ का नाला ढंकने की योजना नहीं है। इस बजट से ताज के चार किमी दायरे के नाले ढंके जाएंगे। अभी तक टेंडर प्रक्रिया नहीं हुई है।