एटा। तेज रफ्तार, लटकती सवारियां और परेशान होते लोग। उनको न नियमों की चिंता और न हादसों की फिक्र। अपनी जेब भरने को वे किसी भी जान जोखिम में डाल सकते हैं। जिम्मेदार भी सब जानते हुए अनजान हैं। हादसों के बाद बड़े-बड़े अभियानों से रोक लगाने की कवायदें होती हैं, लेकिन चंद दिनों बाद वही हालात। शहर की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ते डग्गेमार वाहनों पर रोक लगाने में प्रशासन और पुलिस नाकाम हैं।
जिले में डग्गेमार वाहनों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि जिले की हर सड़क पर डग्गेमारों का राज है। इसके चलते परिवहन निगम को तो लाखों का चूना लग रहा है। सुबह से रोडवेज बस स्टैंड पर डग्गेमार वाहनों की कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं। आलम यह हो चला है कि जिले के एटा-अलीगंज, एटा-कासगंज, एटा-निधौलीकलां, एटा-मैनपुरी, एटा-गंजडुंडवारा मार्ग पर डग्गेमार वाहनों का जमावड़ा रहता है।
परिवहन विभाग भी चुप
डग्गेमार वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए परिवहन विभाग ही कतराता है। विभाग की ओर से कोई भी अभियान नहीं चलाया जाता है। ऐसे में डग्गेमार वाहन चालकों के हौसले बुलंद हैं।
नौनिहाल भी जोखिम में
जिले में डग्गेमार वाहनों में नौनिहालों की जान जोखिम में हैं। जिले के तमाम स्कूलों में बच्चों को लाने और ले जाने का काम डग्गेमार वाहन चालकों के हवाले है। स्कूल प्रबंधन कमाई के चक्कर में बच्चों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं। वहीं अभिभावक भी शिक्षा के लिए अपने लाडलों को डग्गेमार वाहनों में भेजने को मजबूर हैं।
जिले के ये है हादसे जोन क्षेत्र
एटा। वही अगर जिले के चारो ओर हादसा जोन वाली जगहों की बात की जाए तो पिलुआ, मलावन, सुन्ना नहर, मानपुर, नगरिया मोड, भदवास अड्डा, कंगरौल, छछैना नहर पुल, आसपुर चौराहा सहित अन्य स्थान हादसा जोन क्षेत्र है।
प्रमुख हादसे
पांच मई 2017- जलेसर के नगला लाल सिंह के पास मैक्स पलटने से पांच की मौत।
सितंबर 2017- अलीगंज के पास डग्गेमार वाहन पलटने से कई लोग घायल।
अप्रैल 2016-अवागढ़ में मैजिक पलटने से कई बच्चे घायल।
कहते हैं आंकड़े
300 मैक्स वाहन हैं जिले में
542 टाटा मैजिक हैं जिले मेें
256 मेटाडोर का है पंजीकरण
350 टेंपों हैं जिले में
सड़क हादसों का रिकार्ड
वर्ष मौत घायल
2018 153 183
2017 177 183
2016 109 158
2015 205 421
2014 189 363
2013 146 298
2012 215 350
2011 169 274
2010 204 43