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जीएसटी: रियायतों का उपहार चाहिए

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आगरा। न केवल रोजगार, बल्कि निर्यात में भी बेहतर काम कर रही सूक्ष्म, लघु इकाइयों को प्रोत्साहन की जरूरत है। नई कर प्रणाली जीएसटी में टैक्स छूट के साथ ड्यूटी ड्रा बैक को वापस लाया जाए, तभी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा का मुकाबला निर्यातक कर सकेंगे।
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विदेश व्यापार नीति पर जीएसटी के प्रभाव विषय पर फिओ, डीजीएफटी और नेशनल चैंबर द्वारा आयोजित सेमिनार में निर्यातकों ने रियायतों का उपहार मांगा। आगरा के चमड़ा, जूता, इंजीनियरिंग कंपोनेंट, संगमरमर, पत्थर, कालीन, हस्तशिल्प के निर्यातकों ने विदेश व्यापार के लिए नई कर प्रणाली जीएसटी और पुरानी प्रणाली वैट के बीच आ रही दिक्कतों को गिनाया।

सीजीएसटी कमिश्नर आरसी सांखला, वाणिज्य मंत्रालय के डिप्टी डीजीएफटी गगनदीप सिंह, असिस्टेंट डीजीएफटी डीटी पराटे, सीजीएसटी सहायक आयुक्त सिद्धार्थ तिवारी ने उद्यमियों को जीएसटी के प्रावधान समझाए और उनकी दिक्कतों को दूर करने का भरोसा दिलाया। फिओ कोआर्डिनेटर आलोक श्रीवास्तव ने निर्यातकों और आयातकों के लिए भारतीय ट्रेड पोर्टल के फायदे गिनाए।
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उन्होंने कहा कि एक ही जगह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, कस्टम नियम, आरबीआई के निर्देश, बैंकिंग और निर्यात प्रचार योजनाएं इस पर उपलब्ध हैं। सेमिनार में पूर्व अध्यक्ष प्रदीप वार्ष्णेय, प्रमोद अग्रवाल, प्रदीप वासन, मनोज बंसल, विशाल गर्ग, पूजा मिस्त्री, यामिनी चतुर्वेदी, अशोक गुप्ता, विनय मित्तल, मनीष अग्रवाल, तुषार जिंदल मौजूद रहे।
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