कासगंज। खादर की जमीन के लिए खूनी संघर्ष की मजिस्ट्रेटी जांच में तहसील स्तरीय अधिकारियों को क्लीन चिट मिल गई है। हालांकि पूरे मामले में एक लेखपाल को दोषी माना गया है। दोषी लेखपाल पर कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया है।
विगत 17 दिसंबर केा जिले में खादर की जमीन पर कब्जे को लेकर किलौनी के रामकिशोर और किसौल के राम रहीस के बीच खूनी संघर्ष हो गया था। खूनी संघर्ष में 100 राउंड से अधिक गोलियां चलीं थी और पांच लोगों की मौत हो गई थी। संघर्ष में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। विवादित जमीन पर रामरहीस के परिवार ने गेहूं की फसल बो रखी थी और दूसरे पक्ष के रामकिशोर ने कब्जे का प्रयास किया। मामले से पटियाली तहसील का प्रशासन कठघरे में आ गया था। इसका प्रमुख कारण पहले से जमीन के विवाद संबंधी शिकायतें तहसील प्रशासन की नजर में थीं, लेकिन तहसील प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया था।
मामले में मजिस्ट्रेटी जांच बैठाई गई थी। साढ़े आठ महीने के बाद यह जांच पूरी हुई। एडीएम राकेश कुमार सिंह ने जांच आख्या जिलाधिकारी को सौंप दी है। मजिस्ट्रेटी जांच में तहसील के सभी अधिकारियों को क्लीन चिट दी गई है, केवल लेखपाल को दोषी करार दिया है। लेखपाल पर तहसीली प्रशासन को समय से सूचना न देने, शिकायत निस्तारण न करने आदि के आरोप में मजिस्ट्रेटी जांच में लापरवाही को दोष लेखपाल पर आया है। इसके चलते उसे निलंबित कर दिया है। डीएम आरपी सिंह ने बताया कि पूरी गहनता के साथ जांच की गई है। उन्होंने बताया कि लेखपाल पहले भी निलंबित हो चुका है। उसे जांच के निष्कर्ष के बाद निलंबित कर दिया गया है।