मैनपुरी/कटरा समान। सरकार प्राइमरी शिक्षा पर लाखों रुपये खर्च कर रही है। फिर भी छात्र-छात्राओं को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कहीं भवन जर्जर हैं तो शिक्षकों की तैनाती नहीं है। यही नहीं स्कूलों तक पहुंचने का रास्ता भी इतना खराब है कई अभिभावक को बच्चों को कंधे पर बिठाकर वहां तक छोड़ने जाते हैं।
जिले में 2200 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें अव्यवस्थाओं का आलम है। कहीं शिक्षकों की कमी के चलते कई स्कूल बंद चल रहे हैं तो वहीं जो खुले हैं उनके कई भवन जर्जर हैं। कई बार शिक्षकों की शिकायत पर भी विभागीय अधिकारी नहीं सुनते हैं।
पुराने जमाने का बना कन्या जूनियर हाईस्कूल कटरा का भवन जीर्ण-क्षीण हाल में है। ईंटों की बनी छत कभी भी गिर सकती है। फिर भी प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है। कभी भी बड़ी घटना हो सकती है। उक्त स्कूल में चार कमरों का भवन 1964 में बनकर तैयार हुआ था। जिसमें कक्षा छह, सात, आठ की कक्षाएं लगती हैं।
कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय के लिए रास्ता नहीं है। बच्चे कीचड़ में घुसकर आते हैं और गिरकर चोटिल भी होते हैं। उनके बस्ते कीचड़ में गिरकर खराब हो जाते हैं। लेकिन अभी तक इसकी किसी को सुध नहीं है। इमारत भी जर्जर हाल में है। जबकि कई स्कूलों में पहले हादसे हो भी चुके हैं।
प्राथमिक विद्यालय बम्हनीपुर को जाने के लिए आम रास्ता नहीं है। जिससे विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने में परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि हमें अपने बच्चों को कंधों पर बिठाकर स्कूल छोड़ने जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने कच्चे रस्ते पर खड़े होकर की विरोध दर्ज कराया।
प्राथमिक विद्यालय कुरसंडा में 40 छात्र पंजीकृत हैं। स्कूल जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है व शौचालय झाड़ियों में होने के कारण बच्चे वहां नहीं जाते। स्कूल परिसर में गांव के लोग अपनी फसल रखकर अतिक्रमण कर रहे हैं।
जूनियर हाईस्कूल नगला खोखन में 28 छात्र पंजीकृत हैं। 35 वर्षों से बनी स्कूली इमारत चार अगस्त 2016 को ढह गई। उस समय छात्र प्रार्थना कर रहे थे। इसके चलते बड़ा हादसा होने से बच गया था। बचे हुए भवन में बड़ी बड़ी दरारें पड़ी हैं। बरसात या गर्मी में बच्चों को खुले मैदान में घास में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
बीएसए विजय प्रताप सिंह का कहना है कि जर्जर भवनों की जानकारी है इसकी मरम्मत के लिए और नवीन भवन बनवाने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। धनराशि यदि मिल जाएगी तो भवन की मरम्मत या नए बनवा दिए जाएंगे।