दिल्ली और मथुरा के बीच यमुना का जल इतना जहरीला हो गया है कि जलीय जीवजंतु समाप्त होने लगे हैं। देश की राजधानी से कृष्ण की नगरी तक इस नदी के लिए करीब 2500 फैक्ट्रियां ‘कालिया’ बनी हुई हैं।
द्वापर में कालिया ने लोगों को यमुना से दूर कर दिया था, वर्तमान में यही काम यह कारखाने कर रहे हैं। इनके अपशिष्ट ने यमुना के जल में घुलित आक्सीजन की मात्रा को एक मिलीग्राम प्रति लीटर के निचले स्तर तक पहुंचा दिया है। यमुना में जलीय जीवजंतु जिंदा रहें इसके लिए जल में घुलित आक्सीजन की मात्रा 4-5 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए।
यमुना की सेहत को उसके किनारे बसे शहर ही बिगाड़ रहे हैं। नालों का पानी तो यमुना में सीधे गिर ही रहा है फैक्ट्रियों का पानी भी नालों से होते हुए यमुना में पहुंच रहा है। मथुरा जिले में ही प्रदूषण विभाग ने 67 ऐसी फैक्ट्रियां चिह्नित की हैं जो शहर के बीच चल रही हैं और इनमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल सीधे यमुना में पहुंच रहे हैं। ये फैक्ट्रियां तो वह हैं जिन्हें प्रदूषण विभाग नोटिस जारी कर चुका है जबकि हकीकत में संख्या 700 के करीब है।
कोसीकलां में भी छोटे-बड़े 300 कारखानों का पानी नालों से होते हुए यमुना में पहुंच रहा है। फरीदाबाद, पलवल और होडल के भी तमाम कारखाने ऐसे हैं जो यमुना को कहीं न कहीं दूषित कर रहे हैं।
स्थिति ये है कि जलचर भी मरने लगे हैं। पानी में आक्सीजन की मात्रा बढ़ने से जलचरों का दम घुटने लगा है। मथुरा, होडल, पलवल, फरीदाबाद और दिल्ली में की गई पानी की जांच में बीओडी (बायोलॉजिकल आक्सीजन डिमांड) 4 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक मिली है। जो खतरनाक स्टेज है। बीओडी एक लीटर पानी में तीन मिलीग्राम होना चाहिए लेकिन चार से भी ऊपर आया है। कई ऐसे खतरनाक जहरीले तत्व भी पाए गए हैं जो जलचरों की मौत का कारण बन रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टास्क फोर्स बनेगी
मथुरा। अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक टास्क फोर्स बनने जा रही है। इस टास्क फोर्स में मुख्यालय के अफसरों के साथ ही यमुना किनारे बसे जनपदों के अफसरों को भी शामिल किया जाएगा। यह अधिकारी चेकिंग करेंगे कहां और किस तरह से फैक्ट्रियां यमुना को दूषित कर रही हैं। ऐसी फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की जाएगी।
शहर में चल रहे ढोल, बाइब्रेटर का मामला एनजीटी में लंबित है। हमने कॉमन इंफुलेंट ट्रीटप्लांट को उच्चीकृत किए जाने के लिए नोटिस दिया है। अब जल्द ही ईटीपी वाले प्लांटों का निरीक्षण कर उन्हें अपग्रेड कराया जाएगा।
-डा. अरविंद कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी मथुरा।