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जब भी आप किसी की मदद करेंगे तब मुझे पाएंगे : दलाई लामा

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मैनपुरी। प्रवचन से विदाई लेते वक्त दलाई लामा की सरलता और उनके उदार व्यक्तित्व का हर कोई कायल हो गया। मंच से जाते वक्त उन्होंने सभी उपासकों से हाथ जोड़कर विदाई ली। फिर सिर झुकाकर बड़े प्रेम से सबका अभिवादन स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि जब भी लोग उनकी बताई बातों का अनुसरण कर दूसरों की मदद करेंगे तब वे उन्हें अपने साथ पाएंगे।
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तीन दिवसीय धम्म प्रवचन के लिए आए दलाई लामा प्रवचन के अंतिम दिन भावुक दिखे। प्रवचन खत्म करने के बाद जब सभी लोग उठ खड़े हुए तो उन्होंने हाथ जोड़कर सबसे विदाई ली। उन्होंने कहा कि तीन दिन के साथ के बाद आज वे सभी लोगों से जुदा हो रहे हैं, लेकिन ये केवल शरीर की दूरियां हैं। उनकी आत्मा हमेशा उनकी बताई गई बातों के रूप में सभी के साथ रहेगी। अंत में फिर एक बार उन्होंने सभी उपासकों का सिर झुकाकर अभिवादन स्वीकार किया। आयोजकों को प्रमाणपत्र वितरण कर वे 11 बजे प्रवचन स्थल से प्रस्थान कर गए। कुछ देर होटल में रुकने के बाद वे हवाई पट्टी पर चले गए।

जब दलाई लामा ने ली चुटकी
प्रवचन के बाद दलाई लामा ने विदाई के दौरान चुटकी ली। उन्होंने उपासकों से कहा कि धम्म प्रवचन के दौरान जो बोधिचर्यावतार नामक पुस्तक उन्हें दी गई है, वे उसे पढ़ें। अगली बार जब भी उनका मिलन हो तब तक इस पुस्तक के पेज काले हो जाने चाहिए। अगर पेज काले नहीं हुए तो वे ये मानेंगे कि आपने ये किताब पढ़ी ही नहीं। इस पर सभी उपासक व दलाई लामा मुस्कुरा पड़े।
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धैर्य रूपी पानी की बौछार से ही क्रोध रूपी अग्नि का शमन संभव
बौद्ध धर्म गुरु बोले-आंतरिक शत्रु जीवन पर्यंत पहुंचाते हैं क्षति
मैनपुरी। तीन दिवसीय धम्म प्रवचन के लिए जसराजपुर आए बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने अंतिम दिन धैर्य को धारण करने का संदेश दिया। उपासकों से कहा कि धैर्य रूपी पानी की बौछार से ही क्रोध रूपी अग्नि का शमन संभव है। अंतिम दिन प्रवचन में लगभग आठ हजार उपासकों की भीड़ उमड़ी।

धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि सभी जीवधारी सुख चाहते हैं, कोई नहीं चाहता है कि उसे जीवन में दुख मिले। उसे मालूम नहीं होता है कि सारे दुखों का कारण तो वह खुद ही हैं। हमारे मन में जो द्वेष, स्वार्थ व ईर्ष्या रूपी शत्रु बैठे हैं। ये हमें हानि पहुंचा रहे हैं। इनके न हाथ हैं न पैर हैं, फिर भी ये हमारी काया को अपने वश में कर लेते हैं। हमारे शरीर में रहकर ये हमें ही हानि पहुंचाते हैं। पूरे जीवन भर इनका प्रभाव क्षणभर के लिए कम नहीं होता है। केवल इन्हें जड़ से खत्म किया जा सकता है। इनके शमन के लिए धैर्य ही एकमात्र साधन हैं। हम अपने धैर्य से इन पर प्रहार कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि धैर्य का प्रयोग करने के लिए भी एक शत्रु की आवश्यकता होती है। वह शत्रु भी हमारे लिए गुरु के समान होता है। हमारे जीवन कोई निश्चित नहीं है, इसलिए आज से ही चिंतन शुरू करें।

वास्तविकता को जानने का करें कोशिश
संसार के बारे में बताते हुए दलाई लामा ने कहा कि हमें मानव शरीर संसार की वास्तविकता को जानने के लिए मिला है। हम फिर भी वास्तविकता को जानने के लिए कोशिश नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हम मोर देखते हैं वह अनेक रंगों के कारण सुंदर दिखता है। इसी प्रकार मानव शरीर भी कई चीजों से मिलकर सुंदर दिखता है।

निरंतरता से ही शांत होगा चित्त
धम्म प्रवचन में उन्होंने कहा कि हमारा चित्त चंचल होता है। हम अगर एक बार उसे अपने वश में करते हैं तो अगले ही पल वह फिर से भाग जाता है। इसके लिए जरूरी है निरंतरता। निरंतरता के साथ अभ्यास करके हम अपने चित्त को शांत कर सकते हैं। उन्होंने लोगों से दूसरों की मदद करने के लिए कहा। इसके लिए उन्होंने मदर टेरेसा, महात्मा गांधी व नेल्सन मंडेला जैसी विभूतियों के उदाहरण भी दिए।
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