फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों की आय दोगुनी करने के दावों पर महंगाई की चोट

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
एटा। किसान की आय बढ़ाने को लेकर हाल ही में काफी हो हल्ला हो रहा है। इसे लेकर केंद्र और प्रदेश की सरकार बड़े बड़े दावे कर रहीं हैं। लेकिन खाद, बजी के साथ खरपतवार नाशक के दामों में हुई बढ़ोत्तरी से फसल की लागत भी तो बढ़ गई है। बढ़ते दामों ने सरकार के दावों की हवा निकाल दी है।

इस बार रबी की फसल करने वाले किसानों को फसल बुवाई में महंगाई का सामना करना पड़ेगा। खासतौर से आलू और गेहूं की फसल पर इसका खासा असर दिखाई देगा। दरअसल, चाइना केमिकल पर रोक लगाए जाने की वजह से फर्टिलाइजर और खरपतवार की दवा महंगी हुई है। दुकानदारों का कहना है कि फर्टिलाइजर और कीटनाशक दवाओं में केमिकलों का प्रयोग किया जाता है।
विज्ञापन


इस वजह से दामों में बढ़ोत्तरी हो रही है। गत वर्षों की तुलना में फर्टिलाइजर और कीटनाशक दवा में इस वर्ष 15 से 20 प्रतिशत रेट बढ़ गए है। वहीं आलू के बीज और गेहूं के बीज के दाम में भी इजाफा हुआ है। इसके अलावा खाद के दाम में हुई बढ़ोत्तरी भी रबी की फसल की बुवाई को महंगा कर रही है। बढ़ते डीजल और बिजली के दामों से भी किसान सिंचाई को लेकर काफी चिंतित हैं। वहीं फसल उत्पादन का पर्याप्त मूल्य न मिल पाने से किसान सरकार के दावों को खोखला बता रहे हैं।


- कुछ इस तरह बढ़े रेट
उद्यान विभाग के अनुसार गत वर्ष जहां आलू का बीज 1250 रुपये प्रति क्विंटल था। वहीं इस वर्ष 2480 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं दुकानदारों ने बताया कि आलू बुवाई से पहले आलू की धुलाई होती है। गत वर्ष एक हजार रुपये प्रति लीटर थी। वहीं इस वर्ष 1200 रुपये प्रति लीटर हो गई है। डीएपी के रेट में भी काफी बढ़ोत्तरी हुई है। गत वर्ष 1120 रुपये प्रति पैकेट था। वहीं इस वर्ष 1435 रुपये प्रति पैकेट बिक रहा है। खरपतवार को मारने के लिए मेट्रावीजन दवा 1500 रुपये प्रति लीटर थी। वह इस वर्ष दो हजार रुपये प्रति लीटर बिक रही है।
बढ़ते दामों पर एक नजर
2017 2018
आलू का बीज 1250 प्रति पैकेट 2480 प्रति पैकेट
आलू की धुलाई 1000 रु प्रति लीटर 1200 रु प्रति लीटर
डीएपी 1120 प्रति पैकेट 1435 प्रति पैकेट
खरपतवार नाशक 1500 रु प्रति लीटर 2000 रु प्रति लीटर
-------------
किसानों की बात
खाद बीज के दाम में बढ़ोत्तरी लगातार हो रही है। इसके चलते फसल उत्पादन महंगा होता जा रहा है। वहीं किसान को फसल का पर्याप्त मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
जुगेंद्र सिंह, नोजरपुर
खाद और बीज के साथ साथ कीटनाशक दवा के रेटों ने किसानों की कमर तोड़ रखी है। सरकारी योजनाओं का भी किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
रामौतार सिंह, काजीखेड़ा
किसानों को पंजीकरण कराने के बाद भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। बाजार से महंगी दवा और खाद ही खरीदना पड़ रहा है।
जोनर सिंह, रामनगर
गत वर्षों की तुलना में इस वर्ष खाद और बीज के दाम बढ़ गए है। महंगाई के चलते किसान मटर की बोवाई नहीं कर पा रहा है।
नेत्रपाल सिंह, मिरहची
दुकानदार की बात
चाइना से केमिकल आने पर रोक लगी हुई है, जबकि कीटनाशक दवाओं में केमिकल का प्रयोग होता है। इसलिए दवाओं के रेटों में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई है।
विज्ञापन

रूपक कुमार चोला, दुकानदार
वर्जन
केमिकल से फर्टिलाइजर के दामों में अंतर पड़ा है। कीटनाशक दवाओं में किसी भी तरह की कोई वृद्धि नहीं है। किसानों से अपील है कि वह निजी दुकानों के बजाए कृषि विभाग की इकाइयों से कीटनाशक दवा ले। सरकार की ओर से इकाइयों पर अनुदान भी दिया जा रहा है।
विजय शंकर, उप निदेशक कृषि
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें