एटा। एटा डिपो में हुए भ्रष्टाचार के दौरान अलीगढ़ परिक्षेत्र में तैनात अधिकारी अब मुख्यालय लखनऊ में ऊंचे ओहदे पर पहुंच गए हैं। ऐसे में जांच प्रभावित होने की पूरी संभावना है। सूत्रों की मानें तो ऊंचे ओहदे पर बैठे लोग जांच को दबाने में जुट गए हैं। हालांकि कर्मचारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने तक शांत नहीं बैठा जाएगा।
बता दें कि विगत दिनों एटा डिपो में बसों का खड़ा दिखाकर करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया। करोड़ों रुपये के घोटाले के सामने आने पर अधिकारियों के कान खड़े हो गए। बताया जा रहा है कि घोटाले के दौरान अलीगढ़ परिक्षेत्र में तैनात अधिकारियों का अब प्रमोशन हो चुका है और अधिकारी अब ऊंचे ओहदों पर हैं। ऐसे में घोटाले की काली स्याही उनके दामन को भी दागदार कर सकी है। उन्हें विश्वास है कि उच्चस्तरीय जांच में उनका फंसना तय है। ऐसे में अधिकारी अपने पदों का दुरुपयोग कर जांच को दबाने में जुट गए हैं।
रोडवेज विभाग में घोटालों की कमी नहीं है। विगत दिनों परिवहन निगम के चित्रकूट परिक्षेत्र में घपले की जांच प्रबंध निदेशक ने शिकायत के आधार पर कराई गई थी। इसमें बहुत बड़े स्तर पर गबन का खुलासा हुआ था। इसमें चित्रकूल सेवा प्रबंधक को निलंबित किया गया था। मामले की जांच के बाद खुलासे से घबराए अधिकारियों के गले सूख चुके हैं और उन्हें गर्दन फंसने का डर सता रहा है।
रोडवेज बसों से होने वाली आय से परिवहन विभाग (एआरटीओ) दफ्तर में यात्री कर जमा किया जाता है, जो यात्रियों से टिकट पर होने वाली आय से जमा होता है। हालांकि जिन बसों से होने वाली आय अधिकारियों और कर्मचारियों के माध्यम से गबन की गई है उसका यात्री कर भी जमा नहीं किया गया है, जो लाखों रुपये दहोने का अनुमान है। ऐेसे में परिवहन विभाग भी यात्री कर की जांच करने के लिए शिकंजा कस सकता है।