एटा। तूफान को लेकर जिले में तबाही से बचने को अलर्ट जारी है, लेकिन अगर तूफान आता है, तो तबाही तय है। जिले में जर्जर होते सरकारी और प्राइवेट भवनों को लेकर प्रशासन बेखबर है। तूफान में जर्जर इमारतें भी हादसे का सबब बन सकती हैं।
पिछले दिनों आगरा और आसपास के जिलों में आए तूफान में सबसे ज्यादा नुकसान जर्जर इमारतों को हुआ। अगर जिले में तूफान आता है, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। वर्ष 2015 में आए भूकंप के झटकों के दौरान प्रशासन ने लेखपालों, नगरपंचायत और नगरपालिकाओं से जर्जर भवनों की सूची मांगी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में जिम्मेदारों की अनदेखी आम लोगों पर भारी पड़ सकती है।
बरसात के दिनों में हादसे का डर
जिले के राजकीय इंटर कालेज में बने सरकारी आवासों में आए दिन मलबा टूटकर गिरता रहता है। व्यस्ततम बाजार मैनगंज में कई पुराने भवन जर्जर हो चुके हैं। घंटाघर की जर्जर गुंबदों से आए दिन मलबा गिरता रहता है। कई लोग घायल हो चुके हैं।
पिछले साल भी बारिश के दौरान जिला प्रशासन ने संबंधित भवन स्वामियों को इन भवनों को ढहाने के निर्देश दिए थे। ग्राम प्रधानों, नगर पंचायतों एवं नगर पालिका प्रशासन को भी ऐसे भवनों को चिह्नित कर कार्रवाई करने को कहा था, बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं हुई। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रामदत्त राम का कहना है कि जर्जर भवनों को लेकर सर्वे का काम चल रहा है। जेई को निर्देश दिए गए हैं। जर्जर भवनों को लेकर पालिका संजीदा है।
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सरकारी कार्यालय भी जर्जर
सहायक निदेशक मत्स्य कार्यालय के अलावा जिला अस्पताल परिसर, पुलिस लाइन एवं कोतवाली देहात परिसर में बनीं आवासीय इमारतों की भी हालत ठीक नहीं हैं। पुराने जीआईसी भवन को भी धराशायी होने का इंतजार है। सौ साल से अधिक पुरानी इमारत के हॉल की आधी छत गिर चुकी है।