फिरोजाबाद। गांव दतावली और लौकीगढ़ी अंग्रेजों के खिलाफ हुए सत्याग्रह आंदोलन की याद दिलाते हैं। दिसंबर 1930 और जनवरी 1931 में गांव दतावली और लौकीगढ़ी में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लगान नहीं देने के नारे लगते थे। इस अहिंसात्मक आंदोलन की कीमत किसानों को अपने जमीन और नौकरी गंवाकर चुकानी पड़ी थी।
लगान नहीं देने के आंदोलन ने फिरोजाबाद में भी शुरू की गई । आंदोलन से फिरोजाबाद और नारखी ब्लाक प्रभावित हुआ। लौकीगढ़ी और दतावली गांव लगानबंदी के लिए चुने गए। लगान न देना पड़े इसलिए ग्रामीणों ने पहले ही पलायन शुरू कर दिया था। अंग्रेजों का विरोध करके ग्रामीण गांव छोड़ कर चले गए थे।
अंग्रेज सरकार की पुलिस गांव में पहुंचे लेकिन वहां कोई नहीं मिला। इसके 25 लोगों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाल दिया गया था। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भोलू सिंह ने किसानों को लगान न देने की प्रतिज्ञा दिलाई थी। अंग्रेजी सरकार के नुमाइंदों को जब इसका पता लगा तो उनकी सौ बीघा जमीन लेकर बेदखल कर दिया। ग्रामीण नौकरशाहों से डरे नहीं थे। दतावली में लगान वसूलने के लिए पहुंचे अफसरों के साथ तहसीलदार को किसानों ने बंधक बना लिया था। इस पर ब्रिटिश हुकूमत ने किसानों पर जुल्म और बढ़ा दिए थे।