मैनपुरी। देहात की 172 बालिकाओं को अक्षर ज्ञान नहीं है। यह बालिकाएं अभी भी क, ख, ग नहीं जानती हैं। उनके लिए शिक्षा का अधिकार बेमानी साबित हो रहा है। परिजन की उदासीनता तथा संबंधितों की लापरवाही से इन बालिकाओं का भविष्य अभी तक अंधेरे में है।
इन बालिकाओं को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण ने पहल की है। पढ़े बेटी बढ़े बेटी अभियान की हकीकत उन बेटियां की हालत वयां करती है जो पढ़ने की उम्र में मां बाप के साथ काम में हाथ बंटाती नजर आती हैं। विधिक सेवा प्राधिकरण ने ऐसी बेटियों की पहचान कराने के लिए पैरालीगल वालंटियर का सहारा लिया है। डोर टू डोर किए गए सर्वे के बाद 172 ऐसी बालिकाओं की पहचान की गई है जिनकी पढ़ाई की उम्र में वह शिक्षा पाने से वंचित हैं। सर्वे में ही पता चला इन परिवारों की बालिकाओं को शिक्षा दिलाने की पहल नहीं की गई है। शिक्षा का अधिकार क्या है इसकी इन परिवारों को जानकारी नहीं है।