मथुरा। राजकीय इंटर कालेज और जिलाविद्यालय निरीक्षक कार्यालय की जमीन के बाद अब जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की जमीन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। करीब 45 एकड़ क्षेत्रफल वाले डायट परिसर की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में लोअर कोर्ट ने दो माह में जमीन पर दूसरे पक्ष को कब्जा देने के आदेश दिए हैं। वहीं, आदेश के चलते डायट द्वारा अपील दायर करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
सिविल लाइन क्षेत्र में कई दशकों तक संचालित हुआ जिलाविद्यालय निरीक्षक कार्यालय अब यहां नहीं है। उक्त जमीन पर निजी स्वामित्व साबित हो चुका है। शहर के बीच स्थित राजकीय इंटर कालेज की जमीन भी सरकार न्यायालय में हार चुकी है। अब संकट दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित रिफाइनरी टाउनशिप के सामने स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्था की जमीन पर नजर आ रहा है। हाईवे से जुड़ी डायट की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में लोअर कोर्ट ने फैसला डायट के खिलाफ दिया है।
कोर्ट ने जमीन दो माह में खाली करने को कहा है। हालांकि 1996 में कोर्ट ने डायट की याचिका पर यथास्थिति के आदेश दिए थे, जिसे अब खत्म करते हुए दूसरे पक्ष में फैसला सुनाया है। डायट परिसर की करीब 45 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री 1958 में विद्यालय के नाम हुई थी। इसमें से कुछ हिस्से पर कांशीराम आवासीय योजना भी स्थापित है।
डायट प्राचार्य डा. मुकेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट के फैसले पर अपील दायर करने की अनुमति शासन ने दे दी है। अपील दायर करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
सरकारी मशीनरी पर सवाल
डायट की भूमि पर आए फैसले को लेकर पूर्व चेयरमैन रविंद्र पांडेय और विनोद चौधरी ने सरकारी मशीनरी पर सवाल उठाए हैं। कहा है कि सरकारी जमीनों का भू-माफियाओं के साथ बंदरबांट हो रहा है। वे इस मामले में तीसरा पक्ष बनने की न्यायालय से कोशिश करेंगे।