फिरोजाबाद। प्रदेश सरकार द्वारा आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की घोषणाएं फिलहाल जिले में कारगर नहीं हो पा रही। आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी है। अधिकांश चिकित्सालय किराये के अथवा जीर्ण-क्षीर्ण भवनों में संचालित हो रहे हैं।
जिले में कुल 26 आयुर्वेदिक एवं दो यूनानी चिकित्सालय संचालित हैं। जिले में कुल 10 आयुर्वेदिक चिकित्सकों की तैनाती के कारण ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में संचालित चिकित्सालय चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। वहीं शासन द्वारा जरूरी प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान नहीं करने के कारण संसाधनों की कमी भी इन चिकित्सालयों में साफतौर पर दिखाई देती है। खासतौर पर जांच संबंधी उपकरण उपलब्ध नहीं होने के कारण आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए वहां पहुंचने वाले मरीजों को
जिला अस्पताल सहित महावीर नगर में जहां जिला स्तरीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हैं वहीं शिकोहाबाद स्थित करहरा, सिरसागंज, पैगू, गढ़सान, मुहम्मदपुर, धनुपुरा, जौधरी एवं बछगांव आदि में आयुर्वेदिक चिकित्सालय संचालित हैं।
-सरकार आयुर्वेदिक चिकित्सा पर विशेष ध्यान दे तभी कुछ बात बन सकती है। सरकार ने कई जड़ी-बूटियों पर भी रोक लगा दी है। आयुर्वेदिक कॉलेज की कमी भी आयुर्वेद चिकित्सा की तरक्की में बाधा है।
राजेश जैन सरल - वैद्य
-सरकार ने आयुर्वेद दवाओं पर लगने वाले विभिन्न करों में खासी बढ़ोत्तरी कर दी है। वास्तवित रूप से आयुर्वेदिक दवाओं व जड़ी-बूटियों के निर्माता एवं विक्रेताओं को संरक्षण की आवश्यकता है।
अनिकेत वर्मा - आयुर्वेद दवा विक्रेता
धन्वंतरि की जयंती आज
फिरोजाबाद। हरिओम शर्मा आचार्य बताते हैं कि कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को जन्मे भगवान धन्वंतरि हिंदू धर्म में मान्य देवताओं में एक हैं। समुद्र के गर्भ से उत्पन्न भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के जनक एवं धन-धान्य प्रदान करने वाले हैं। देव-दैत्य संग्राम के दौरान हुए समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर उत्पन्न हुए। आयुर्वेद के जन्मदाता धन्वंतरि पुरातन चिकित्सा शास्त्र आयुर्वेद के जनक भी माने जाते हैं। चूंकि भगवान धन्वंतरि का जन्म धनतेरस के दिन हुआ। इसलिए उन्हें धन्वंतरि आरोग्य, सेहत, आयु और तेज के आराध्य देवता कहा गया हैं। दीपावली पर्व पर इनकी पूजा का महत्व सर्वविदित है।