मथुरा। टैंक चौराहा अर्थात पाकिस्तान पर भारतीय सेना की गौरवशाली जीत का गवाह। शहर में यह वह सबसे खूबसूरत चौराहा है, जहां से गुजरते ही सीना खुद व खुद चौड़ा हो जाता है। हाथ सलामी के लिए उठने लगते हैं। शरीर में अजीब स्फूर्ति आ जाती है। यह सब भारतीय सेना के प्रति गौरव के उस भाव को प्रदर्शित करता है, जो सन् 1971 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर पाई थी।
मथुरा मुख्यालय वाली पश्चिमी क्षेत्र (वन कोर) के सैनिकों ने 1971 में पाकिस्तानी सेना को रौंद दिया था। इस क्षेत्र के युद्धक टैंकों ने पाकिस्तानी सेना के टैंकों पर बसंतर क्षेत्र में इस तरह गोले बरसाए कि दुश्मन मैदान छोड़ भागे। पाकिस्तानी टैंक तहस-नहस हो गए। इस युद्ध में भारतीय सेना की जीत के बाद वन कोर के सैनिक 34 पाकिस्तानी टैंकों को मथुरा ले आए। अपनी गौरवशाली जीत का प्रतीक इन पाक टैंकों को इसी चौराहा पर रख दिया गया।
पाकिस्तान पर जीत के बाद 16 दिसंबर को वन कोर बसंतर डे मनाने लगी और इस चौराहा का नाम बसंतर चौराहा रख दिया। इसी चौराहा पर पाकिस्तानी टैंक भी आम लोगों को दिखाने के लिए रख दिए गए। 1996-97 में इस चौराहा को संवारा गया। इसे शहर का सबसे खूबसूरत चौराहा बना दिया। यहां से पाकिस्तानी टैंकों को हटाकर उन भारतीय युद्धक टैंकों को सजा दिया, जो विजेता टैंक थे। यह टैंक आज भी इसी स्थान पर भारतीय सेना की वीरता का प्रदर्शन कर रहे हैं। इन्हीं टैंकों को देखकर शहरवासी इस चौराहा को टैंक चौराहा कहते हैं, जिसे अब युद्धा टैंक का नाम दे दिया गया है।