एटा। कुपोषण के खात्मे के लिए चल रही योजनाएं स्टाफ के अभाव में लापरवाही की भेंट चढ़ रही हैं। शबरी संकल्प, पुष्टाहार और किशोरी शक्ति जैसी योजनाएं बाल विकास विभाग में स्टाफ के अभाव से जूझ रही हैं। आलम यह है कि जिले में संचालित नौ परियोजनाओं के संचालन का जिम्मा चार सीडीपीओ संभाल रही हैं। वहीं विभाग में 63 पदों के सापेक्ष महज 12 सुपरवाइजरों की तैनाती है। विभाग ने पदों को पूर्ण करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।
प्रदेश सरकार के बाल विकास विभाग की हालत बेहद खराब है। कर्मचारियों के अभाव में योजनाओं का संचालन विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ब्लॉक स्तर पर परियोजनाओं को संचालित करने के लिए नौ बाल विकास अधिकारियों के पद हैं, लेकिन जिले में केवल चार अधिकारी तैनात हैं। किसी महिला अधिकारी को तैनाती दी भी जाती है तो वह अपने गृह क्षेत्र में स्थानांतरण करा लेती हैं।
वहीं जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की देखरेख के लिए भी 63 सुपरवाइजरों के सापेक्ष महज 13 सुपरवाइजर कार्य कर रही हैं। वर्ष 2004 से सुपरवाइजरों की भर्ती न होने से विभाग को सीमित संख्या में काम चलाना पड़ रहा है।
ऐसे में योजनाओं को पलीता लगता नजर आ रहा है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो कार्यरत सीडीपीओ मेें एक-एक अधिकारी को तीन-तीन ब्लॉक का काम संभालना पड़ रहा है। वहीं एक सुपरवाइजर पर 100-100 आंगनबाड़ी केंद्रों का काम संभालना पड़ रहा है। विभाग ने अब शासन को कर्मचारियों की भर्ती और स्टाफ को पूर्ण करने के लिए प्रस्ताव भेजा है।
जिले की परियोजनाआें में भी कार्यालय लिपिक के पद खाली हैं। जिला मुख्यालय पर चार लिपिक तैनात हैं। इनमें से एक छुट्टी पर रहते हैं। जबकि यहां सात पद सृजित हैं। इसके अलावा नौ परियोजनाओं में वरिष्ठ सहायक और कनिष्ठ सहायक के 18 पद रिक्त हैं।
विभाग के 1864 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का अभाव है। 1864 में से 1754 आंगनबाड़ी की तैनाती है। वहीं 1594 में 1499 सहायिकाएं तैनात हैं।
27930 बच्चे हैं कुपोषित
6930 बच्चे अतिकुपोषित
04 सीडीपीओ की तैनाती नौ परियोजनाओं में से
110 पद आगंनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के खाली
13 सुपरवाइजर तैनात हैं 63 पदों में