एटा। गरीब महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत सिलिंडर दिए, उसके फायदे भी महिलाओं को तमाम विज्ञापनों और प्रचार प्रसार के माध्यम से बताए। प्रधानमंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना से काफी उत्साहित थे। महिलाएं भी लकड़ी के चूल्हे से उठने वाले धुएं से छुटकारा मिलने से खुश थीं। मई 2016 में शुरू हुई इस योजना से जिन घरों में गैस के चूल्हे जले थे उनकी आग 2019 आने से पहले ही बढ़ते सिलिंडर के दामों की वजह से ठंडी हो गई। अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थी इस योजना को फेल बता रहे हैं। वजह साफ है कि उनके घरों में फिर वही पुराने लकड़ी के चूल्हे धधकने लगे हैं और महिलाओं की आंखों में आंसू हैं।
अब तक 71 हजार चूल्हा, सिलिंडर वितरित
उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को नि:शुल्क चूल्हा और सिलिंडर का वितरण किया गया। जिले में अब तक 71000 परिवारों को योजना का लाभ दिया गया। शुरूआत में सिलिंडर मिलने के बाद तो एक-दो महीने तक लाभार्थियों ने सिलिंडर ले लिया, लेकिन अब सिलिंडर के बढ़ते दाम आफत बन गए हैं। 971 रुपये का सिलिंडर लेने में गरीब लाभार्थियों के पसीने छूट रहे हैं।
नहीं मिल रही सब्सिडी
लाभार्थी सिलिंडर लेने के लिए रुपये तो जमा कर रहे हैं। लेकिन उनकी सब्सिडी उनके खातों में नहीं पहुंच रही। सिलिंडर के दाम दिन प्रतिदिन आसमान छू रहे हैं। ऐसे में लाभार्थियों का कहना है कि सिलिंडर के दाम इतने बढ़ाने थे, तो सरकार ने गरीबों को योजना का लॉलीपाप दिया ही क्यों। गरीब एक हजार रुपये कहां से जुटा पाएगा? जुटा भी लिए तो सब्सिडी न मिली तो गरीबों को अपना पेट काटना पड़ेगा। लोगों ने सरकार को कोसते हुए खुद को सरकार द्वारा ठगा हुआ बताया।
यह था योजना का उद्देश्य
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना का उद्देश्य था कि गांव में सिलिंडर और गैस कनेक्शन देकर चूल्हे से महिलाओं को निजात दिलाई जाए। चूंकि चूल्हे से निकलने वाला धुआं महिलाओं को घातक साबित होता है, लेकिन योजना की मंशा ही पूरी नहीं हो सकी।
गांव में सिलिंडर की दिक्कत
योजना के पीछे एक और पहलू सामने आया है कि ग्रामीण इलाकों में सिलिंडर की आपूर्ति दिक्कत का सबब बन रही है। हालांकि गैस एजेंसियों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन तमाम गांवों में अब तक सिलिंडर की आपूर्ति सुचारु नहीं हो सकी है। ग्रामीणों को खाली सिलिंडर रिफिल कराने के लिए शहर की दौड़ लगानी पड़ती है।
जैसे थे-अच्छे थे, अब परेशान हैं
सिलिंडर के दाम बढ़ गए हैं। गरीब कैसे इतना महंगा सिलिंडर खरीद पाएगा। सिलिंडर खरीद भी लो तो सब्सिडी न मिले तो और परेशानी बढ़ जाए। - राजकुमारी
जब सिलिंडर मिला था, तो एक महीने सब सही चला। अब सिलिंडर महंगा है तो चूल्हे पर खाना पका रहे हैं। इससे तो जैसे थे अच्छे थे अब परेशान हैं। - रीता
सिलिंडर के बढ़ते दाम ही गरीबों की सबसे बड़ी आफत है। सरकार ने गरीबों को लॉलीपाप दिया है। लगा था लाभ मिलेगा, लेकिन सब बेकार की बातें हैं। - सुमन
सिलिंडर की सब्सिडी खाते में नहीं पहुंच रही है। सिलिंडर के बढ़ते दाम आफत बन रहे हैं। ऐसे में लकड़ी, कोयले के चूल्हों पर खाना बनाना मजबूरी है। - सुरेखा
इनका कहना है
जिले में अब तक 71 हजार कनेक्शन बांटे गए हैं। सभी जगह सिलिंडर पहुंच रहे हैं। सब्सिडी नहीं आना तकनीकी समस्या हो सकती है। जिसे दिखवाकर सही करा दिया जाएगा।
महेंद्र कुमार, एरिया मैनेजर हिंदुस्तान पेट्रोलियम
आंकड़ों पर नजर
71 हजार जिले में बांटे गए है कनेक्शन
971 रुपये का है सिलिंडर का रेट
01 मई 2016 को शुरू हुई थी योजना
72 हजार कनेक्शनों का दिया गया है लक्ष्य