फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तालों में बंद कुपोषण मुक्ति की कवायद

विज्ञापन
तालों में बंद कुपोषण मुक्ति की कवायद - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
एटा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पोषण नहीं मिल रहा है जिससे लगातार कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है, अतिकुपोषित बच्चों में भी पहले की अपेक्षा वृद्धि दर्ज की जा रही है। मगर जिम्मेदार अपने आंकड़ों को ही मानते चले आ रहे हैं। मंगलवार को अमर उजाला टीम ने आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल की, तो तमाम केंद्रों पर ताले लटके नजर आए।
विज्ञापन

फोटो नंबर-1
रेवाड़ी मोहल्ला स्थित विद्यालय में आंगनबाड़ी केन्द्र पर बच्चों को बैठने तक की जगह नहीं थी। यहां आए दिन बच्चों को पोषण के नाम पर ठेंगा दिखाया जाता है। बच्चे आते हैं और वापस चले जाते हैं। यहां पर तैनात आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां अपने विकास करने में लगी हैं जब कि बच्चों के विकास से कोई लेना देना नहीं है।
फोटो नंबर-2
बापू विद्या मंदिर के हालात ऐसे हैं कि बच्चे सिर्फ खाना खाने आते हैं। उनको मानक के अनुसार पोषण नहीं दिया जाता, खानापूर्ति करके भगा दिया जाता है। इसके बाद इनको कोई पूंछने वाला नहीं है कि बच्चे पढ़ रहे हैं अथवा कहां पर हैं।
विज्ञापन

फोटो नंबर- 3
पटियाली गेट उर्दू मदरसा में आने वाले बच्चों को उल्टा सीधा भोजन दे दिया जाता है, तालीम के नाम पर बच्चों को ठगा जा रहा है। उनके मानसिक विकास की ओर यहां पर तैनात स्टाफ का कोई ध्यान नहीं है।
फोटो नंबर-4
पटियाली गेट प्राथमिक विद्यालय में आंगनबाड़ी केन्द्र आए दिन बंद रहता है, ताला लटका रहने के चलते बच्चों ने भी केंद्र जाने में रूचि दिखानी बंद कर दी है। अगर बच्चे जाते भी हैं तो उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
21 हजार बच्चे कुपोषित
जिले में 21 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण के शिकार हैं जब कि छह हजार बच्चे अतिकुपोषण का दंश झेलने को मजबूर हैं। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ताले लटके रहते हैं।
सीएम सुपोषण घर योजना से आस
जिले में बढ़ रहे कुपोषण की स्थिति गंभीर होती जा रही है। एनएफएचएस की सर्वे रिपोर्ट में पाया गया है कि जन्म से पांच वर्ष तक के बच्चों में छह फीसदी गंभीर कुपोषण के शिकार हो गए हैं। इस पर नीति आयोग भी चिंता जाहिर कर चुका है। अब कुपोषण से लडने के लिए मुख्यमंत्री खुद सीएम सुपोषण घर योजना चालू करने जा रहे हैं जिसमें सीएचसी और पीएचसी पर केंद्र खोलने की कवायद की जानी है। योजना से उम्मीद है कि जिले में कुपोषण का हाल सुधरेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें