मैनपुरी। चोरी के मामले में नाबालिग की गिरफ्तारी कर पहचान उजागर करने के मामले में सीजेएम ने इंस्पेक्टर कोतवाली और एसओजी प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा है। थाना बेवर में दर्ज चोरी के मुकदमे में पुलिस ने नाबालिग को जेल भेजा है। मामले की सुनवाई तीन नवंबर को होगी। थाना बेवर में दर्ज चोरी के एक मुकदमे में इंस्पेक्टर कोतवाली और एसओजी प्रभारी ने एक नाबालिग को जेल भेजा है। नाबालिग के वकील ने जमानत के लिए आवेदन किया तो कोर्ट में बताया कि आरोपी की जन्म तिथि सात नवंबर 2002 है। पुलिस को आरोपी के नाबालिग होने की बात बताने के बाद भी पुलिस ने उसके साथ बाल अपचारी जैसा व्यवहार नहीं किया।
अदालत में पेश करने से पहले और बाद में उसकी पहचान उजागर की। सीजेएम शक्ति सिंह ने इंस्पेक्टर कोतवाली और एसओजी प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा है। आदेश में कहा गया है कि बाल अपचारी होने के बाद भी उसकी पहचान क्यों और कैसे उजागर की है। आरोपी का उम्र मीमो क्यों नहीं बनाया गया है। डीजीपी ने वर्ष 2007 में तथा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। मामले की सुनवाई के लिए तीन नवंबर की तारीख तय कर दी गई है।
प्रधानाचार्य से मांगा आयु प्रमाण पत्र
मैनपुरी। नाबालिग की आयु के संबंध में सीजेएम ने उसके कॉलेज के प्रधानाचार्य से भी आयु प्रमाण पत्र तलब किया है। प्रधानाचार्य से कहा गया है तीन नवंबर को सुनवाई से पूर्व नाबालिग आरोपी की आयु के संबंध में कालेज के अभिलेखों के अनुसार प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए।