एटा। न तो मुफ्त में हवा मिलती है और न ही पीने का पानी। पेट्रोल पंप संचालकों की मनमानी से उपभोक्ताओं के लिए हवा और पानी पूरी तरह से बंद हैं। मानक ताक पर हैं और पेट्रोल पंप संचालक मौज में। उपभोक्ताओं को सुविधा दिलाने का वादा करके पेट्रोल पंप खोलने वाले संचालकों ने सारे नियमों की धज्जियां उड़ा दी हैं। जिले में 90 पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को मिलने वाली सुविधाएं पूरी तरह से नदारद हैं। न तो पेट्रोल पंप संचालक सुध ले रहे हैं और प्रशासन भी मौन साधे हैं। पढ़िए रिपोर्ट...
मुफ्त हवा तो सोचिए भी नहीं...
मानकों के मुताबिक पेट्रोल पंप पर वाहन की मुफ्त में हवा जांच और भरवाने की सुविधा उपभोक्ता को दी जाती है, लेकिन जिले के पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं के लिए सुविधा पूरी तरह से बंद है। तमाम पेट्रोल पंपों पर तो कंप्रेशर और हवा भरवाने की सुविधा के लिए उपकरण तक नहीं हैं।
पेयजल और शौचालय नदारद
जिले में तमाम पेट्रोल पंपों पर जन सुविधाएं नदारद हैं। पेट्रोल पंप पर उपभोक्ताओं को न तो पीने का पानी नसीब होता है और न ही सुविधाओं के नाम पर शौचालय बने हैं। साथ ही जहां शौचालय बने हैं, उनमें गंदगी की भरमार उपभोक्ताओं की मुसीबत बनती है।
नहीं दिखते रेट
पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं की सुविधाओं के लिए बड़े अंकों में प्रतिदिन के पेट्रोल और डीजल के रेटों को प्रदर्शित किया जाना चाहिए। मगर जिले में पेट्रोल पंपों पर यह रेट केवल मशीन पर ही दिखाई देते हैं।
फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र भी नहीं
जिले में पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ता सुरक्षा के लिए फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन सुविधाएं भी बेमानी हैं। पेट्रोल पंपों पर न तो बाल्टियों में बालू दिखती हैं और न ही अग्निशमन यंत्र। साथ ही दुर्घटना की स्थिति में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी मुहैया नहीं हो पाती।
शिकायत पुस्तिका गायब
मानकों पर गौर करें तो हर पेट्रोल पंप पर शिकायत पेटिका या पुस्तिका होने का प्रावधान होता है। साथ ही कंपनी के अधिकारियों के नंबर भी होने चाहिए, लेकिन जिले के पेट्रोल पंप पर यह सुविधा भी नहीं हैं।
नो हेलमेट और नो पेट्रोल गायब
पिछले साल डीएम अमित किशोर ने 17 जून से नो हेलमेट और नो पेट्रोल अभियान चलाने के निर्देश दिए थे, लेकिन जिले में अभियान फेल हो गया। पेट्रोल पंप संचालक भी लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में असफल रहे।
कहते हैं लोग
शहर के पेट्रोल पंप पर पीने का पानी तक नही मिलता। हवा भरने की सुविधा तो दूर की बात है।
मोहम्मद फैजान
पेट्रोल पंपों पर मानकों का अभाव रहता है। यहां न तो शौचालय बने हैं और न ही कोई अन्य सुविधा मिलती है।
चक्रपांडेय तिवारी
पेट्रोल पंप संचालकों की मनमानी से उपभोक्ताओं को चुप रहना पड़ता है। जिले में पेट्रोल पंपों पर अव्यवस्थाएं रहती हैं।
मंगल सिंह
जिले में अधिकांश पेट्रोल पंप दबंग लोगों के हैं। अगर कोई शिकायत करता भी है, तो उसे डर दिखाकर चुप करा दिया जाता है।
देवेंद्र वर्मा