मथुरा। जनपद में कृषि भूमि बीमार हो रही है। जिंक, पोटास, सल्फर सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो रही है, जबकि इलेक्ट्रीकल कंडेक्टविटी बढ़ रही है। इससे न केवल उत्पादन पर प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि फसल भी रोग संक्रमण की चपेट में आ रही हैं। यह स्थिति कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग की मृदा परीक्षण लैब की रिपोर्ट जाहिर कर रही हैं।
जनपद की इन मृदा परीक्षण लैबों में कृषि भूमि की जांच के लिए आ रही मिट्टी की रिपोर्ट कृषि क्षेत्र के लिए साफ तौर पर खतरे का संदेश दे रही है। यहां जमीन में सॉल्ट तेजी के साथ बढ़ रहा है। इसका साफ असर छाता से चौमुहां, अडीग और गोवर्धन क्षेत्र में नजर आता है। यहां जमीन में ऊसर का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। अडीग, गोवर्धन के आसपास क्षेत्र में तो स्थिति ज्यादा खराब है। इस क्षेत्र में फसल की बुवाई के दौरान बीजों का अंकुरण प्रभावित हो रहा है। इसका असर फसल उत्पादन पर ही पड़ रहा है।
उप कृषि निदेशक धुरेंद्र कुमार का कहना है कि कृषि भूमि में पोषक तत्व जिंक, बोरोन, पोटास, सल्फर, आयरन कम हो रहे हैं, जबकि सॉल्ट बढ़ रहा है। यह चिंताजनक स्थिति है। कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. यतेंद्र सिंह ने बताया कि इस स्थिति को रोकने के लिए मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड वितरण किए जा रहे हैं। इसमेें मिट्टी की जांच का रिकार्ड मौजूद रहेगा। इसके आधार मिट्टी में आवश्यक तत्वों की पूर्ति कराई जाएगी।