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विद्युत व्यवस्था निजी हाथों में सौंपना दुर्भाग्यपूर्ण

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फिरोजाबाद। प्रदेश के पांच शहरों की विद्युत व्यवस्था निजी कंपनियों को सौंपने के विरोध में विद्युत विभाग का धरना बुधवार को जारी रहा। निजीकरण के विरोध में अभियंता राजस्व वसूली व डिस्कनेक्शन के कार्य से दूर रहे।
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लेबर कालोनी स्थित कार्यालय पर आयोजित धरने को संबोधित करते हुए अधीक्षण अभियंता सुनील सक्सेना ने कहा कि उप्र. सरकार ने दुर्भाग्यपूर्ण रूप से पांच शहरों को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया है, जिससे किसानों व गरीब जनता का अहित होगा। दक्षिणांचल के अध्यक्ष इं. राजवीर सिंह ने कहा कि सरकार के इस फैसले से युवाओं में बेरोजगारी बढ़ेगी।

विद्युत विभाग में नौकरी के रास्ते बंद हो जाएंगे। एक्सईएन दुर्गाप्रसाद ने कहा कि आगरा के निजीकरण के फैसले से उप्र. पावर कारपोरेशन को 4000 करोड़ की चपत लग चुकी है। राज्य विद्युत जूनियर इंजीनियर संगठन के जनपद अध्यक्ष धर्मेंद राजपूत ने कहा कि निजीकरण के विरोध में ध्यानाकर्षण आंदोलन जारी रहेगा।
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विद्युत विभाग द्वारा निजीकरण के विरोध में किए जा रहे आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन के शैलेंद्र प्रताप सिंह, हरेंद्रपाल सिंह, गणेशपाल सिंह, सुरेशपाल सिंह ने समर्थन दिया। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के मंडल उपाध्यक्ष गवेंद्र पाल सिंह, कांच उद्योग के महासचिव, सीटे के जनपद सचिव भोले सिंह यादव, नवल किशोर, ठेका मजदूर यूनियन के पदाधिकारी आरके पाठक, हरीमोहन शर्मा, यूपी वर्क्स फ्रंट के प्रदेश महामंत्री राजेश सचान ने आंदोलन का समर्थन किया।
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