सोरों(कासगंज)।
सूकर क्षेत्र सोरों इतना पवित्र देव स्थल है कि सोरों को लाखों की संख्या में राजस्थान से आने वाले श्रद्धालु सोरों जी के नाम से पुकारते हैं। तीर्थयात्री नाम के साथ जी शब्द जरूर लगाते है, तीर्थ के प्रति इतनी पवित्र भावना और सम्मान इनके मन में रहता है। अमर उजाला के सोरों को तीर्थस्थल बनाओ अभियान पर केए महाविद्यालय में आयोजित फोकस ग्रुप में शिक्षाविदों ने तीर्थस्थल की उपेक्षा के लिए लचर राजनीतिक पैरवी को अहम कारण माना।
शिक्षाविदों ने चर्चा में तीर्थ नगरी के पौराणिक, धार्मिक, सांस्कृतिक महत्व के अलावा आर्थिक पक्ष पर चर्चा करते हुए सोरों क्षेत्र को शीघ्र तीर्थस्थल घोषित कर सुनियोजित विकास की जरूरत बताई। रामायण, महाभारत एवं पुराण काल में सोरों विशेष महत्व का स्थान माना है। गोष्ठी में शिक्षाविदों ने यह सुझाव भी रखा कि सूकर क्षेत्र की यात्रा पर आने वाले लोग इस स्थान को सोरों जी कहकर पुकारते हैं तो इस क्षेत्र के लिए भी सोरों को सोरों जी के रूप में ही बोलें अच्छा होगा। शिक्षाविदों ने कहा कि सूकर क्षेत्र में जन्म लेकर संत तुलसीदास ने पूरे विश्व को इतना पवित्र ग्रंथ रामचरितमानस दे दिया जो संपूर्ण जीवन जीने की कला बताता है।
शिक्षाविदों ने सोरों को तीर्थस्थल घोषित किए जाने की मांग की और अमर उजाला की पहल की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इस दौरान महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा. सुबोध मिश्रा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस दौरान प्राचार्य विष्णु कुमार तोमर,डा. अंजना वशिष्ठ ,डा. एपी गुप्ता,डा. आदर्श मोहन राठी,डा. एमएस चंद्रबरिया, डा. मिथलेश वर्मा, डा. प्रमिला वशिष्ठ, डा. बृजेंद्र यादव, डा. कमलेश कुमार सिंह, डा. मिथलेश पांडे, डा. रानू शर्मा, डा. पूनम शर्मा, डा. नरेश भारद्वाज, डा. पंकज यादव, डा. प्रमोद वशिष्ठ, डा. उमेश यादव, डा. अनुपम मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन शिक्षाविद डा. राधाकृष्ण दीक्षित ने किया।