केंद्र और राज्य सरकार डिजिटल इंडिया की राहत पर चलते हुए तमाम योजनाओं को ऑनलाइन संचालित कर रही है, लेकिन जिले में तमाम विभागों के पास इनके संचालन के लिए कंप्यूटर तक नहीं हैं। ऐसे में योजनाओं से संबंधित रिपोर्ट आदि भेजने के लिए कर्मचारियों को साइबर कैफे के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। यहां तक कि सूचना विभाग के पास भी सूचनाओं के आदान-प्रदान के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
युवा कल्याण विभाग, बाट मांप, चकबंदी, मत्स्य, कृषि रक्षा, मनोरंजन कर सहित कई कई विभागों के पास आज भी कंप्यूटर नहीं हैं। जबकि इन विभागों के तहत योजनाओं का संचालन ऑनलाइन हो गया है या किया जा रहा है। इधर, बेसिक शिक्षा विभाग के लेखा विभाग, खेलकूद विभाग और शिक्षा गुणवत्ता प्रकोष्ठ में भी कंप्यूटर नहीं हैं। कलक्ट्रेट के संयुक्त कार्यालय में 8-10 कर्मचारी बैठते हैं, लेकिन यहां दो ही कंप्यूटर लगे हैं। इस स्थिति में योजनाओं का ऑनलाइन संचालन एक बड़ी मुश्किल बन गया है।
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कर्मचारी भी प्रशिक्षित नहीं
कई विभागों में कंप्यूटर लगे हैं तो यहां के कर्मचारियों के प्रशिक्षित न होने के कारण यह धूल फांक रहे हैं। पिछले दिनों प्रशासन ने अधिकांश कर्मचारियों को कंप्यूटर प्रशिक्षण लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन कुछ ही कर्मचारियों ने कंप्यूटर सीखना मुनासिब समझा। हालात यह हैं कि विभाग संविदा कर्मचारी के सहारे अपना काम पूरा करा रहे हैं।
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विभागों में अधिकतर काम ऑनलाइन हो रहे हैं। अधिकांश विभागों में कंप्यूटर लगे हैं। जिनमें कंप्यूटर लगे हैं और काम नहीं होता, उनको निर्देश जारी किए जाएंगे। साथ ही कर्मचारियों को कंप्यूटर प्रशिक्षण लेने के निर्देश जारी करेंगे।
- सतीश पाल, एडीएम प्रशासन