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सुविधाओं के नाम पर करोड़ों खर्च, परेशानी बरकरार

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एटा। जिला अस्पताल में सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए हैं, लेकिन डाक्टरों की कमी मरीजों के लिए दिक्कत का सबब बन रही है। अस्पताल में ही डायलिसिस यूनिट बनी है, लेकिन नेफ्रोलोजिस्ट नहीं है। डाक्टरों की कमी का आलम यह है कि 27 में से महज 11 डाक्टर तैनात हैं। जिनमें बमुश्किल आठ ही रोज ओपीडी में पहुंचते हैं। वहीं अस्पताल में तमाम अव्यवस्थाएं मरीजों के लिए आफत बनी हुई हैं।
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स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में एटा हमेशा से पिछड़ा रहा है। निजी चिकित्सकों का अभाव है। ऐसे में लोग जिला अस्पताल पर ही निर्भर हैं। लेकिन अस्पताल की खुद सेहत खराब है, जो मरीजों के लिए आफत बनती है। जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में 27 डाक्टरों के पद हैं जिनमें से 11 की तैनाती है, लेकिन इसमें भी दो डाक्टर आकस्मिक विभाग में रहते हैं, तो एक-दो आए दिन छुट्टी पर होते हैं। वहीं मरीजों का आंकड़ा रोज 1500 से अधिक पहुंचता है। ऐसे में एक डाक्टर पर 180 से अधिक मरीजों का जिम्मा है। वहीं सुविधाओं की बात करें तो अस्पताल में डायलसिस, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड समेत तमाम जांचों की सुविधा है, लेकिन विशेषज्ञों का अभाव भी मरीजों के लिए बढ़ी परेशानी बना हुआ है।
गंभीर मरीजों को कर दिया जाता है रेफर
जिला अस्पताल को रेफर सेंटर कहा जाए, तो कुछ गलत नहीं होगा। यहां आने वाले गंभीर मरीजों को डाक्टर इलाज देने से पहले रेफर कर देते हैं। आए दिन डाक्टरों की कमी के चलते तमाम मरीजों को आगरा-अलीगढ़ रेफर किया जाता है।
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रोज 80 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड और एक्सरे
जिला अस्पताल में एक और नियम सुविधाओं की खिल्ली उड़ाता है। यहां रोज 80 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड और एक्सरे होता है। अगर मरीज ज्यादा होते हैं, तो उनको अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है। एक रेडियोलॉजिस्ट होने से मरीजों को दिक्कत होती है।
मजाक बनी डायलिसिस यूनिट
हाल ही में जिला अस्पताल में शुरू हुई डायलिसिस यूनिट भी मजाक बनकर रह गई है। यहां पर नेफ्रोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी ईएनटी विशेषज्ञ के पास है। ऐसे में मरीजों के लिए डायलिसिस सुविधा महज सपना बनकर रह गई है।
पीने के पानी की नहीं है पर्याप्त व्यवस्थाएं
जिला अस्पताल में हर रोज हजारों लोगों की भीड़ जुटती है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से पीने के पानी की कोई पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं की गई हैं।
दवाओं का भी टोटा
यूं तो अस्पताल प्रशासन दवाओं का स्टॉक पूरा होने का दावा कर रहा है, लेकिन तमाम दवाएं अस्पताल में नहीं है। एआरवी की कमी भी मरीजों के लिए परेशानी बनी है।
निरीक्षण के बाद भी सुधार नहीं
पिछले दिनों डीएम आईपी पांडेय ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। उम्मीद थी कि जल्द ही अस्पताल की सेहत सुधरेगी, लेकिन कुछ नहीं हो सका। अस्पताल में जलभराव, डाक्टरों की मनमानी पर लगाम नहीं लग सकी।
चाची को दवा दिलाने आया था, डाक्टर हैं नहीं। काफी देर से इंतजार कर रहा हूं। अब बिना दवाएं लिए ही वापस जाना पड़ रहा है। पीने का पानी नहीं मिल इसकी वजह से चाची को परेशानी हो रही है।
हरकेश
बच्ची को दवा दिलाने आई हूं, बच्चे वाले डाक्टर अपने कमरे में नहीं हैं। ऐसे में अब बच्चे को दवाएं एक लड़की से लिखवाई हैं। पता नहीं इसकी दवा से आराम मिलेगा कि नहीं।
सुलेखा
आंखों की दवाई लेने आई थी, डाक्टर आज बैठे नहीं हैं। अब दवा नहीं मिलने से परेशानी बढ़ रही है। बिना दवा लिए ही वापस जाने को मजबूर हैं।
सीमा
कई बार दवा लेने आए हैं डाक्टर मिलते ही नहीं हैं। जिस रोग का डाक्टर हैं उसके नहीं बैठने से दूसरे डाक्टर दवा लिख देते हैं इसलिए बीमारी में कोई वायदा नहीं हो रहा है।
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गणेश
कहते हैं आंकड़े
27 डाक्टरों के पद हैं जिला अस्पताल में
11 डाक्टरों की तैनाती है अस्पताल में
180 मरीज देखते हैं एक चिकित्सक
1500 मरीज रोज पहुंचते हैं अस्पताल
80 एक्सरे, अल्ट्रासाउंड ही होते हैं एक दिन में
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