अवैध शराब कारोबारियों पर पुलिस का चला डंडा
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मैनपुरी। शराब समाज के लिए अभिशाप बनती जा रही है। इसके कारण किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने पति खो दिया। वहीं, पुसैना गांव में तो शराब ने कई घरों के चिराग बुझा दिए। गांव के अच्छी सोच और विकास के लिए शराब मुक्त परिवेश चाहिए। शहर से सटा पुसैना गांव में कच्ची शराब का कारोबार चला आ रहा है। ईशन नदी के किनारे बसे इस गांव में जब पुलिस ने अवैध शराब बनाने को लेकर सख्ती की तो यहां बाहर से लाकर शराब बेची जाने लगी। गांव के अधिकतर युवाओं को शराब ने अपनी गिरफ्त में ले रखा है। गांव में कई परिवार ऐसे हैं, जिनका मुखिया ही नहीं रहा। अब उनके पत्नी और बच्चे मेहनत मजदूरी कर किसी तरह पेट पाल रहे हैं।
गांव निवासी 40 वर्षीय विजयी की कच्ची शराब पीने से चार साल पहले मौत हो चुकी है। वह घर का मुखिया था, उसके सात बेटियां और एक बेटा है। पति की मौत के बाद पत्नी रानी ने ही मेहनत मजदूरी कर जैसे तैसे घर को संभाला। तीन बेटियों की शादी कर चुकीं हैं। चार बेटियों की शादी होना अभी बाकी है। गांव निवासी पहुंची भी शराब पीने के आदी थे। चार साल पहले ही कच्ची शराब पीने से उनकी भी मौत हो गई थी। पत्नी राधा दूसरों के घरों में काम करने अपने चार बच्चों को पालन कर रही हैं। बच्चे अभी छोटे हैं, इसलिए सारी जिम्मेदारी राधा पर ही है। लेकिन राधा को डर है कि कहीं ये शराब उसके बेटों को भी न छीन ले।
तीन साल पहले गांव निवासी श्रवण की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। नशे में होने की वजह से ही हादसा हुआ था। श्रवण के कोई संतान नहीं थी। उसकी मौत के बाद पत्नी अब गांव में एक झोपड़ी में गुजर बसर कर रही है। वह बस इतना ही कहती है कि किसी तरह गांव के अन्य लोगों को इस जहर से बचा लिया जाए। अवैध शराब कारोबार करने वालों के विरुद्ध संपत्ति जब्तीकरण समेत प्रभावी कार्रवाई की गई है।थानाध्यक्षों को निर्देशित किया गया है कि क्षेत्र में अवैध कारोबार किसी भी कीमत पर पनपने न दें।