मैनपुरी। मयन ऋषि की तपोभूमि मैनपुरी में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां ऐतिहासिक महत्व के कई सरोवर और स्थल हैं। इनका अपना पौराणिक महत्व है। बावजूद इसके जिले में पर्यटन को पंख नहीं लग सके। देखरेख के अभाव में महाराज तेजसिंह का किला वीरान हो गया। इसके लिए कहीं न कहीं देश और प्रदेश की सरकारें जिम्मेदार रहीं हैं। आज तक किसी भी सरकार ने मैनपुरी को पर्यटन हब बनाने की पहल नहीं की। जिले में पर्यटन को बढ़वा मिलता तो निश्चित ही युवाओं को रोजगार भी मिलता।
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च्यवन ऋषि आश्रम में बना च्यवनप्राश
औंछा क्षेत्र का च्यवन ऋषि आश्रम पौराणिक महत्व समेटे हुए है। मान्यता है कि इसी स्थान पर च्यवन ऋषि ने तपस्या की थी। आश्रम परिसर में ही उन्होंने च्यवनप्राश बनाया था। इसके सेवन से बीमारियां दूर हो जाती थीं। आश्रम परिसर में ही बने अजोम कुंड की मान्यता है कि उसमें स्नान करने से चर्म रोग दूर होते हैं। यह कुंड आज पूरी तरह उपेक्षा का शिकार होने के कारण बदहाल होता जा रहा है। इस कुंड के संरक्षण की व्यवस्था आज तक नहीं की गई।
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यहां पांडवों ने बिताया था वनवास काल
मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर घिरोर क्षेत्र के गांव विधूना में महर्षि मार्कंडेय की तपोभूमि है। महर्षि मार्कंडेय को सभी तीर्थों का भांजा कहा जाता है। मान्यता है कि यह स्थान महाभारत काल में महात्मा विदुर का आश्रम भी था। पांडवों ने वनवास काल में यहां समय व्यतीत किया था। पांडवों के समय के चबूतरों के अवशेष आज भी हैं। यहां से मात्र 200 मीटर की दूरी पर उत्तर की ओर चार दशक पहले घना जंगल था। मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि का यहां आश्रम था। सीता रसोइया के अवशेष आज भी अपना पौराणिक महत्व बताते हैं। वहीं समान पक्षी विहार में पर्यटन को बढ़ावा देने के कुछ प्रयास हुए, लेकिन यहां भी पर्यटनस्थल नहीं बन सका।
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कवायद हुई पर रंग नहीं लाई
मैनपुरी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कवायद तो हुई लेकिन रंग आज तक नहीं लाई। औंछा क्षेत्र में तीन साल पहले खुदाई के दौरान विशाल नर कंकाल मिलने के बाद आगरा से पुरातत्व विभाग की टीम औंछा पहुंची थी। तीन दिन तक किए गए सर्वे के बाद टीम ने औंछा के पौराणिक महत्व को देखते हुए औंछा को पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ावा देने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उस पर भी पहल नहीं होने से प्रस्ताव पूरा नहीं हो सका। सूबे में राजनाथ सिंह की सरकार में पर्यटन मंत्री रहे अशोक यादव ने औंछा को पर्यटक स्थल बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अमल आज तक नहीं हुआ।