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बेटी है कुदरत का उपहार, जीने और पढने का दो अधिकार

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 महिला दिवस पर अपराजिता अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहर के कुंवर आरसी कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं ने कार्यक्रम में शामिल होकर महिलाओं को उनके अधिकार बताए। साथ ही बेटा और बेटी में फर्क न करने की अपील की।
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अपराजिता अभियान के तहत शुक्रवार को शहर से सटे गांव औंडेंय पड़रिया में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की छात्राओं के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन हुआ। छात्राओं ने गांव की महिलाओं को उनके अधिकार बताए। प्रधानाचार्य उर्मिला भदौरिया ने कहा कि बेटी कुदरत का अनमोल उपहार है। इसे जीने और पढ़ने का अधिकार बेटों की तरह ही है। आज बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका वंदना सिंह ने कहा बेटियों के प्रति लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए। बेटियां आज हर क्षेत्र में अपने मां-बाप का नाम रोशन कर रही हैं। उपस्थित छात्राओं ने अपराजिता अभियान के तहत शपथ भी ली।
इस अवसर पर श्वेता पाल, सरिता यादव, तृप्ती भदौरिया, नीतू देवी, अंजना वैस आदि ने गांव की महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संविधान में महिलाओं को पुरुषों की तरह समान अधिकार दिए गए हैं। महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों। इस अवसर पर खुशबू यादव, शिवानी सक्सेना, हनी राजपूत, श्वेता, आरजू, अदिति, दीक्षा, देवांशी चौहान, अनुराधा शर्मा, सारथी, संध्या यादव आदि उपस्थित रहीं।
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बोलीं छात्राएं
महिलाएं आज पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। जरूरत है तो सिर्फ सोच बदलने की।
-गोशिया बानो

बेटियों को भी बेटों की तरह पढ़ने लिखने का अधिकार है। बेटी पढ़ेगी नहीं तो आगे कैसे बढ़ेगी।
-ज्योती पाठक

संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार दिए हैं। महिलाएं जागरूक हों और अपने अधिकारों का इस्तेमाल करें।
-शिवांगी शर्मा

शिक्षा हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। मां-बाप को चाहिए कि वह बेटियों की शिक्षा पर भी ध्यान दें।
दीक्षा रघुवंशी
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