टूंडला रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के इंतजार में बैठे रेलयात्री
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टूंडला। ट्रेनों को समय से चलाने के लिए टूंडला में वर्षों पुरानी सिग्नल प्रणाली को जल्द बदला जाएगा। टूंडला रेलवे स्टेशन ही एक मात्र ऐसा स्टेशन रह गया है, जहां पुरानी सिग्नल प्रणाली काम कर रही है। यह बातें गुरुवार को मंडल रेल प्रबंधक अमिताभ कुमार ने प्रेस से वार्ता करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि टूंडला में सिग्नल प्रणाली को संचालित करने के लिए पांच केबिन काम कर रही हैं। नई सिग्नल प्रणाली को लागू करने के लिए कार्य योजना तैयार कर ली गई है। कम से कम ट्रेनों को प्रभावित किए सिग्नल प्रणाली को बदला जाएगा। अक्तूबर माह तक नई सिग्नल प्रणाली चालू हो जाएगी। इसके बाद सेंट्रलाइज ट्रैफिक कंट्रोल से एक बटन दबाते ही ट्रेनों का संचालन हो सकेगा।
उन्होंने वंदे भारत ट्रेन के विषय पर पूछने पर बताया कि वंदे भारत देश का गौरव है। आए दिन मवेशियों के टकराने से ट्रेन की कुछ न कुछ क्षति हो जाती है। इस संबंध में बात की गई है और जल्द ही एक-एक सेक्शन में कंक्रीट की बाउंड्रीवाल लगाई जाएगी। जिससे मवेशी ट्रैक तक नहीं पहुंच पाएं।
उन्होंने बताया कि टूंडला के यार्ड रीमोडलिंग किया जा रहा है। साथ ही दो नए प्लेटफार्म भी तैयार हो रहे हैं। इसके बाद प्लेटफार्म नंबर पांच प्लेटफार्म नंबर सात हो जाएगा। साथ ही टूंडला स्टेशन की शोभा के लिए एक बड़ा सिग्नल लगाया जा रहा है। जिसकी जगह चयनित कर ली गई है। नए कोच इंडीकेट बोर्ड लगेंगे जिससे यात्रियों को कोचों की सही जानकारी मिल सके। इस दौरान डीटीएम समर्थ गुप्ता मौजूद रहे।
कुभ आयोजन की हुई पूरे विश्व में सराहना
ऐतिहासिक कुंभ को रेलवे द्वारा बहुत ही सफलता के साथ आयोजित किया गया। जिसकी देश ही नहीं पूरे विश्व में सराहना की गई। हर घंटे रेलवे प्रशासन द्वारा लगभग 20 हजार सवारियों को स्टेशन से बिना किसी परेशानी के निकाला गया। यह अपने आप में एक उपलब्धि है। कुंभ के लिए 950 स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं। कहीं कोई भगदड़ नहीं हुई।