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नकली दवाएं बेचने वालाें का नेटवर्क खंगालने में जुटा औषधि विभाग

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कुएं में पड़ी दवाएं। - फोटो : अमर उजाला डेमाे
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मैनपुरी। जिले से नकली दवाओं की बिलिंग मिलने पर औषधि विभाग में खलबली मच गई है। इसके लिए नकली दवाओं के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। एक ओर जहां सभी मेडिकल स्टोर की गोपनीय जांच कराई जा रही है, वहीं मेडिकल स्टोर की वस्तु स्थिति भी देखी जा रही है। विभाग इस पूरी कार्रवाई को गोपनीय बनाए हुए है। आगरा में बन रही नकली दवाओं की जड़े मैनपुरी तक फैली थीं। आगरा में पकड़ी गई नकली दवा फैक्टरी के तार सीधे मैनपुरी से जुड़े थे।
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कुरावली स्थित एक मेडिकल स्टोर से ही दवाओं की बिलिंग की जा रही थी। इसके बाद अब औषधि विभाग जिले में नकली दवाओं के नेटवर्क को खंगालने में जुट गया है। कहीं कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए विभाग इस पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखे हुए है। सबसे पहले इसके लिए थोक विक्रेताओं से दवाओं की बिलिंग का ब्योरा तलब किया जा रहा है। इसके बाद जिस कंपनी की दवाओं की बिलिंग की गई है, उससे भी रिपोर्ट मांगी जाएगी। इसके बाद साफ हो जाएगा कि दवाएं असली हैं या फिर नकली।
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कागजों में चल रहा था मेडिकल
कुरावली के जिस मेडिकल स्टोर से नकली दवाओं की बिलिंग हो रही थी वह औषधि विभाग की टीम के निरीक्षण में मौके पर नहीं मिला था। इसके बाद औषधि विभाग ने लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटी आगरा को भेजी थी। इसके अलावा अब इस बात की भी जानकारी की जा रही है कि मेडिकल स्टोर अपनी वास्तवित लोकेशन पर है भी या नहीं। सूत्रों के अनुसार जिले में भी नकली दवाओं की बिक्री के सुराग मिले हैं। औषधि विभाग इन्हीं के आधार पर अपनी जांच को आगे बढ़ा रहा है। हाल ही में छाछा व सकरा में दो मेडिकल स्टोर के लाइसेंस निरस्त भी किए जा चुके हैं।
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नकली दवाओं में है 90 फीसदी बचत
जानकारों के अनुसार नकली दवाओं में मरीजों से खुली लूट होती है। केवल इन दवाओं में पैकिंग पर पांच से दस फीसदी तक खर्च आता है। इसके बाद बाकी बचा 90 फीसदी भाग सीधे इन दवाओं के बनाने वाले का होता है। इसी के चलते इन दवाओं की बिक्री जोरों पर है।
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थोक के लाइसेंस पर कर रहे फुटकर बिक्री
जिले में थोक के लाइसेंस पर फुटकर में दवाओं की बिक्री भी की जा रही है। इसके पीछे एक बड़ा कारण ये है कि थोक लाइसेंस में फार्मासिस्ट की आवश्यकता नहीं होती है। जबकि रिटेल के लाइसेंस में बिक्री के दौरान मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट का होना अनिवार्य है।
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इतने हैं मेडिकल स्टोर के लाइसेंस
थोक बिक्री लाइसेंस-250
फुटकर बिक्री लाइसेंस- 550

विभाग अपनी कार्रवाई कर रहा है। अगर कहीं भी नकली दवाओं की बिक्री या बनाने की बात सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी।
उर्मिला यादव, औषधि निरीक्षक, मैनपुरी।
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